कोल माइंस की जनसुनवाई के विरोध में बैठे ग्रामीणों को डराने तहसीलदार ने दी बीएनएस में गिरफ्तार कराने की धमकी
धौराभाठा में जिंदल की प्रस्तावित जनसुनवाई का हो रहा ऐतिहासिक विरोध, ठिठुरती ठंड में 14 गांवों के हजारों ग्रामीण कर रहे रतजगा
तमनार के धौराभट्ठा में 8 दिसंबर सोमवार को होने वाली जिंदल की जनसुनवाई के विरोध में हजारों की संख्या में ग्रामीण दिन-रात आंदोलन कर रहे हैं। ठिठुरती ठंड में लगातार बैठे ग्रामीणों की आवाज को दबाने के लिए तमनार तहसीलदार ने एक आदेश निकालकर चस्पा कर दिया है। जिसमें विरोध कर रहे ग्रामीणों पर बीएनएस के तहत कार्रवाई और गिरफ्तारी का भय दिखाया जा रहा है। जिससे विस्थापित होने वाले ग्रामीणों में आक्रोश और बढ़ गया है।
कोयला खदान गारे पेलमा सेक्टर वन की प्रस्तावित जनसुनवाई के विरोध में ग्रामीण एक बार फिर लामबंद हो गए हैं। दिसंबर महीने में इंसान को ठिठुरा देने वाली तेज ठंड के बीच तमनार अंचल के हजारों ग्रामीण धौराभाठा मैदान में खुले आसमान के नीचे रात रात भर जागकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस बार वो अपने क्षेत्र में जन सुनवाई का टेंट भी नहीं लगने देंगे। न ही कंपनी और प्रशासन के लोगों को यहां आने देंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि वे जल, जंगल और जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और आगे भी वो अपनी बनाई रणनीति के आधार पर अपने क्षेत्र में जनसुनवाई का विरोध करते रहेंगे। ग्रामीणों के बताए अनुसार वे इस जनसुनवाई रद्द करने व खदान बंद करने की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट में बड़ा प्रदर्शन करते -हुए उन्हें ज्ञापन सौंप चुके हैं। तब हमारे कड़े विरोध को ध्यान में रखकर इस सुनवाई को अस्थाई तौर पर निरस्त कर दिया गया था लेकिन इस बार पुनः जिंदाल की कोयला खदान की जनसुनवाई को लेकर प्रशासन और जिंदल प्रबन्धन सक्रिय हो चुका है। सोमवार 8 दिसंबर की जनसुनवाई को सफल बनाने के लिए प्रदेश सरकार रायगढ़ जिला प्रशासन और पुलिस के द्वारा हमारे लिए दमन कारी नीति अपना रही है।
तहसीलदार की धमकी से ग्रामीणों का बढ़ा आक्रोश
तहसीलदार तमनार के आदेश के बाद विरोध कर रहे ग्रामीणों का आक्रोश और बढ़ गया। जनसुनवाई के विरोध में बैठे ग्रामीणों को हटाने के लिए तहसीलदार ने जो विवादित आदेश निकाला है। उसमें लिखा है कि तमनार अंतर्गत ग्राम धौराभांठा में साप्ताहिक बाजार मैदान में होने वाली सभा में शामिल होने वाले सर्वसाधारण आम नागरिकों संगठनों को सूचित किया जाता है कि उक्त सभा बिना सक्षम अधिकारी के अनुमति के आयोजित किया गया है। बिना अनुमति के किसी भी सार्वजनिक स्थान में सभा, जुलुस, धरना, प्रदर्शन तालाबंदी व घेराव का आयोजन करा दण्डनीय अपराध है। अतः सर्वसाधारण/आम नागरिकों संगठन या उनके सदस्यों के द्वारा बिना अनुमति ऐसा कोई आयोजन किया जाता है या कार्य में बाधा उत्पन्न करते हैं तो वह कार्यवाही भारतीय संहिता 2023 की धारा 223 के अंतर्गत लोक सेवक द्वारा सम्यक रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा के अपराध की श्रेणी में आयेगा, जिसके लिए नियमानुसार विधिक एवं दण्डात्मक कार्यवाही की जावेगी। एवं उसके लिए स्वयं उत्तरदायी होगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव होगा।
ठिठुरती ठंड में 14 गांवों के हजारों ग्रामीण कर रहे रतजगा
दिसंबर महीने की ठिठुरन में और खेतों में पड़ी अपनी खरीफ की फसल की परवाह किए बगैर धौराभाठा में करीब डेढ़ हजार लोग दिन-रात बैठकर अनशन कर रहे हैं। जिंदल की प्रस्तावित माइंस की बपेट में आ रहे 14 गांवों के लोग यहां लगातार विरोध कर रहे हैं और प्रशासन से जनसुनवाई को निरस्त कर तमनार अंचल में अब किसी और माइंस की एंट्री नहीं होने की मांग कर रहे हैं। विरोध प्रदर्शन करते हुए शनिवार को परिसर में ही ग्रामीणों ने अपने लिए खाना बनाया और देर शाम तक लगातार विरोध करते रहे।
भाजपा कांग्रेस के स्थानीय नेता भी हो गए सेट
जन सुनवाई का विरोध करने वाले ग्रामीणों ने धरना स्थल धौरा भाठा में आए मीडिया कर्मियों को तहसीलदार रायगढ़ का एक लिखित आदेश पत्र दिखाते हुए कह बताया कि इस तरह सरकार हमारे आंदोलन को तोड़कर जिंदल की जनसुनवाई को सफल बनाने का प्रयास कर रही है। इस बात का प्रमाण यह है कि अभी कुछ दिनों पहले भाजपा व कांग्रेस पार्टी के कुछ नेता जी हमारे आआंदोलन को लीड कर रहे थे और पूरी दमदारी से विरोध प्रदर्शन को आगे ले जा रहे थे, वे भी अब सेट हो गए हैं। यही कारण है कि जिंदल के आगे घुटने टेकते हुए वे अब मैदान छोड़कर भाग चुके हैं।
जनसुनवाई निरस्त करवा कर ही लेंगे दम
विरोध कर रहे ग्रामीणों ने बताया कि एक तरफ प्रदेश सरकार हम ग्रामीणों की बात सुनने के लिए जनसुनवाई का आयोजन कर रही है तो दूसरी तरफ प्रशासनिक अधिकारी पत्र लिखकर या फोन पर लगातार हम ग्रामीणों के डरा धमका रहे है ताकि किसी तरह विरोध प्रदर्शन को तोड़ा जा सके। हम हमारे क्षेत्र की जल जंगल जमीन और बच्चों के साथ हमारी आने वाली ग्रामीण पीदधिों को बचाने के लिए संघर्ष का रास्ता चुन चुके है, यहां धौराभाठा से हम जनसुनवाई निरस्त करवा कर ही अपने गांव घर वापस जाएगे।
ग्रामीणों ने कहा दम घुटता है ऐसे विकास से
विरोध कर रहे ग्रामीणों के अनुसार उनके इस क्षेत्र में कई खदान खुलने के कारण पहले ही बहुत ज्यादा विस्थापन हो चुका है। इससे रोजगार और पर्यावरणीय स्थिति को नुकसान भी बहुत ज्यादा हो चुका है लेकिन अब विकास के नाम पर हरे भरे जंगलों को उजाड़ने का यह सरकारी खेल हम किसी भी सूरत में नहीं होने देंगे। ग्रामीणों का कहना है कि सालों से कोयला खदानों के कटते जंगल और अंधाधुंध स्वमन से पर्यावरण संतुलन खतरनाक स्तर तक बिगड़ गया है। प्रदूषण के कारण लोग बीमार हो रहे हैं। सड़कों का इन्फ्रास्ट्रक्चर बेहद कमजोर है। जिससे मौत बनकर दौड़ रहे भारी वाहनों से आए दिन सड़कों पर दुर्घटनाएं हो रही हैं और स्थानीय ग्रामीण अपनी जान गंवा रहे हैं। ऐसे विकास से अब तमनार के अलावा पूरे रायगढ़ जिले का दम घुट रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि जिंदल को खदान मिल जाती है तो आसपास के 15 से 20 गांव बुरी तरह से प्रभावित हो जायेंगे। ग्रामीणों को अपनी पैतृक जमीन और गांव छोड़ने का भी डर है, साथ ही उन्हें उचित रोजगार और विस्थापन मुआवजे की जानकारी नहीं दी जा रही है।
विस्थापितों की आवाज दबा रहे अफसर : राजेश त्रिपाठी
सामाजिक कार्यकर्ता और जनचेतना के राजेश त्रिपाठी ने बताया कि तमनार में अपनी पुस्तैनी जमीन बचाने और हरे भरे जंगलों को उजाड़ने से बचाने के लिए धरने पर बैठे ग्रामीणों को अकसर डरा धमका रहे हैं। तमनार तहसीलदार के विवादित आदेश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये केन्द्रीय वन पर्यावरण मंत्रालय दिल्ली की 14 सितम्बर 2006 की अधिसूचना का खुले आम उल्लंघन है। जिसमें साफ तौर से कहा गया है कि किसी भी परियोजना की जनसुनवाई से पहले प्रशासन ऐसा माहौल तैयार करके देगा, ताकि विस्थापितों के अलावा दूसरा आदमी भी अपनी बात को बिना किसी भय के लिखित था मौखिक रूप से कह सके और अपनी बात रख सके लेकिन यहां पर जिंदल के आगे झुकते हुए प्रशासन दमनकारी नीति अपना रहा है। राजेश त्रिपाठी ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने अपने संगठन के माध्यम से केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से लेकर एनजीटी में भी शिकायत की है।




