दो माह से वेतन लंबित, अब उस पर प्रशिक्षण शुल्क की मार

आपातकालीन सेवा 112 के वाहन चालकों ने पुलिस अधीक्षक के नाम ज्ञापन सौंप निराकरण की रखी मांग
रायगढ़/ जिले में आपात परिस्थितियों में आम नागरिकों के लिए जीवन रेखा मानी जाने वाली 112 आपातकालीन सेवा के सेवक इन दिनों खुद गंभीर संकट से गुजर रहे है। सेवा से जुड़े कर्मचारी, वाहन चालको के, वेतन भुगतान में देरी उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो चुकी है।वही अब नए कंपनी द्वारा 8 हजार 9 सौ रुपए प्रशिक्षण शुल्क लिए जाने के फरमान से इनकी चिंता और बढ़ चुकी है।पहले से ही दो माह का लंबित वेतन और अब उस पर प्रशिक्षण शुल्क की मार जिसे वर्तमान में देने में असमर्थ वाहन चालकों द्वारा पुलिस अधीक्षक के नाम ज्ञापन सौंप लंबित वेतन एवं प्रशिक्षण शुल्क जमा करने कंपनी से समयावधि दिलाने की मांग रखी है।
प्रशिक्षित चालकों से प्रशिक्षण शुल्क वसूलने फरमान
मिली जानकारी के अनुसार 112 सेवा में कार्यरत 50 से अधिक वाहन चालक बीते दो माह से वेतन नहीं मिलने के कारण आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। नियमित ड्यूटी, लगातार शिफ्ट और आपातकालीन दबाव के बीच वे अपने परिवार का भरण-पोषण करने में असमर्थ होते जा रहे हैं।इन्हीं समस्याओं को लेकर 112 सेवा से जुड़े वाहन चालकों ने पुलिस अधीक्षक के नाम ज्ञापन सौंपते हुए शीघ्र समाधान की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि वे जनता की सेवा में दिन-रात तत्पर रहते हैं, लेकिन बदले में उन्हें समय पर वेतन तक नहीं मिल पा रहा है। जिले में वर्तमान में लगभग 15 वाहनों के माध्यम से 112 सेवा संचालित की जा रही है, जिनमें 50 से अधिक चालक अलग-अलग शिफ्टों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि सेवा संचालन से जुड़ी कंपनी में हाल ही में बदलाव हुआ है। पूर्व में यह कार्य एबीपी कंपनी के अधीन था, जिसे अब जीवीके कंपनी को सौंप दिया गया है।कंपनी परिवर्तन के बाद नई ठेका कंपनी द्वारा वर्षों से कार्यरत और पहले से प्रशिक्षित चालकों से प्रशिक्षण के नाम पर लगभग 8,090 रुपये की मांग की जा रही है। इसे लेकर कर्मचारियों में गहरा रोष है। हालांकि वाहन चालकों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि दो माह का लंबित वेतन पहले भुगतान कर दिया जाए, तो वे प्रशिक्षण शुल्क देने को तैयार हैं।लेकिन सवाल यह उठता है कि जो चालक वर्षों से 112 सेवा में कार्यरत हैं, उन्हें दोबारा प्रशिक्षण के नाम पर भारी-भरकम राशि देना कितना न्यायसंगत है।
जर्जर वाहनों से प्रभावित हो रही आपातकालीन सेवा
इस पूरे मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। वर्षों से 112 सेवा में उपयोग हो रहे कई वाहन अब जर्जर अवस्था में पहुंच चुके हैं। बार-बार खराब होने वाले वाहनों के कारण आपातकालीन कॉल पर समय पर पहुंचना मुश्किल हो जाता है।वाहन चालकों का कहना है कि खराब वाहनों से न केवल उनकी जान जोखिम में पड़ती है, बल्कि आपात स्थिति में आम जनता को मिलने वाली त्वरित सहायता भी प्रभावित होती है। इसके बावजूद वाहनों के नियमित रखरखाव, मरम्मत और नए संसाधनों की उपलब्धता पर कोई ठोस ध्यान नहीं दिया जा रहा।
वर्शन/112 के कर्मचारियों द्वारा 2 माह के लंबित वेतन और नई कंपनी द्वारा प्रशिक्षण शुल्क लिए जाने की जानकारी दी गई है।इस संबंध में संबंधित कंपनी प्रबंधन से चर्चा कर समस्या का समाधान किया जाएगा।
अनिल सोनी
एडिशनल एस पी




