ढाई साल पहले नगर निगम को हैंडओवर, न नियमित सफाई न देखभाल, भारी वाहनों की आवाजाही से उड़ती धूल, पैदल चलना भी हुआ मुहाल, क्या स्वच्छता सर्वेक्षण में शामिल नहीं ओवर ब्रिज
रायगढ़/सेतु विभाग द्वारा लगभग 82 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित कोतरा रोड ओवरब्रिज को करीब ढाई वर्ष पूर्व नगर निगम को हैंडओवर कर दिया गया था।जिसका उद्देश्य शहर को सुगम, सुरक्षित और आधुनिक यातायात सुविधा देना था।लेकिन वर्तमान हालात इस बहुचर्चित परियोजना की बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहे हैं। निगम की लगातार अनदेखी के चलते ओवरब्रिज की सड़क आज धूल, गंदगी और दुर्घटना के खतरे का रूप ले चुकी है।ओवरब्रिज की दोनों लेन के किनारों पर भारी मात्रा में धूल और मिट्टी जमा हो चुकी है। रोजाना सैकड़ों की संख्या में भारी वाहनों की आवाजाही के कारण यह धूल उड़कर पूरे मार्ग पर फैल जाती है। नतीजतन, दोपहिया वाहन चालकों, पैदल राहगीरों और आसपास के रहवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सुबह और शाम के समय तो हालात और भी गंभीर हो जाते हैं, जहां उड़ते धूल के गुबार निगम प्रशासन की सफाई व्यवस्था की कहानी बया करते नजर आते है।

पैदल चलना भी जोखिम भरा
गौरतलब हो कि ओवरब्रिज पर बने पैदल मार्ग भी बदहाल स्थिति में हैं। जगह-जगह कचरा, मलबा और धूल की मोटी परत जमी हुई है। कई स्थानों पर किनारे की सतह उखड़ चुकी है, जिससे फिसलने और चोटिल होने की आशंका बनी रहती है।लोगों का भी कहना है कि पुल पर पैदल चलना मजबूरी तो है, लेकिन सुरक्षित बिल्कुल नहीं है।
ढाई साल पहले हैंडओवर के बाद से ओवरब्रिज के नियमित रखरखाव, सफाई और धूल नियंत्रण की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई।न ही पानी के छिड़काव या सफाई को लेकर कोई उपाय अपनाए गए हैं।परिणामस्वरूप, करोड़ों की लागत से बना यह ओवरब्रिज अपनी अनदेखी को बयां कर रहा है।हालांकि सेतु विभाग गाहे बगाहे अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर समय समय पर पुल की सफाई की बात तो कर रहा है।साथ ही यह भी मानता है कि लगातार वाहनों की आवाजाही से कई त्न धूल मिट्टी सड़क पर जमा हो रही है।जिसकी सफाई व्यवस्था को लेकर निगम प्रशासन को भी ध्यान देने की आवश्यकता है।
क्या स्वच्छता सर्वेक्षण में शामिल नहीं ओवर ब्रिज
एक और तो नगर निगम लाखों रुपए खर्च कर शहर को चमकाने में लगा है।जिस से स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर प्रदर्शन सामने आ सके।जिसे लेकर शहर की विभिन्न दीवारों पर आकर्षक पेंटिंग के साथ ही आकर्षक साज सज्जा की जा रही है।वही दूसरी और लोगों के वर्षों की मांग उपरांत निर्मित 82 करोड रुपए की लागत के पुल के रखरखाव और सफाई व्यवस्था को लेकर की जा रही अनदेखी निगम के उदासीन रवैए की झलक है।करोड़ों रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना की मौजूदा स्थिति यह सवाल खड़ा करती है कि क्या निर्माण के बाद रखरखाव की जिम्मेदारी केवल कागजों तक सीमित रह गई है? यदि समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो कोतरा रोड ओवरब्रिज सुविधा के बजाय स्थायी समस्या बन सकता है।
वर्शन/ कोतरा रोड ओवर ब्रिज का निर्माण लगभग 82 करोड रुपए की आगे से हुआ था।पुल पर वाहनों की आवाजाही से जमने वाली मोटी धूल की परत की सफाई बीच बीच के सेतु विभाग द्वारा की जाती है। ढाई वर्ष पूर्व पुल निगम को हैंड ओवर किया जा चुका है।
संतोष कुमार भगत
कार्यपालन यंत्री सेतु विभाग




