आरगूलस बीमारी से जा रही गणेश तालाब के मछलियों की जान, मत्स्य विभाग ने किया निरीक्षण, निगम को सुरक्षा के सुझाए उपाय
रायगढ़/ स्थानीय गणेश तालाब में बीते कुछ दिनों से लगातार मछलियों के मरने की शिकायतों ने अब गंभीर रूप ले लिया है। हालात की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम के बुलावे पर मत्स्य विभाग की टीम ने तालाब का निरीक्षण कर मछलियों की मौत के कारणों की जांच की।
जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि तालाब में मछलियों की मृत्यु का प्रमुख कारण आरगूलस बीमारी है, जिसे आम बोलचाल में “मछली की जूं” कहा जाता है। यह बीमारी आरगूलस नामक परजीवी के कारण होती है, जो मछलियों के शरीर से चिपककर उनका खून चूसता है। इससे मछलियां कमजोर हो जाती हैं और अंततः उनकी मृत्यु हो जाती है।मिली जानकारी के अनुसार, इसी बीमारी के चलते बीते कुछ ही दिनों के अंतराल में दो टन से अधिक मछलियां मृत अवस्था में पाई जा चुकी हैं, जो तालाब की जैविक स्थिति के लिए बेहद चिंताजनक संकेत है।


ऑक्सीजन का अभाव भी बना बड़ा खतरा
गौरतलब हो कि जांच में यह भी सामने आया कि तालाब के पानी में घुलित ऑक्सीजन का स्तर लगातार गिर रहा है। अत्यधिक गंदगी, जैविक अपशिष्ट और मृत मछलियों के सड़ने से पानी में ऑक्सीजन की कमी हो रही है, जिससे जीवित मछलियों पर भी संकट गहराता जा रहा है। ऑक्सीजन की कमी की स्थिति में मछलियां सतह पर आकर तड़पती नजर आती हैं, जो सामूहिक मृत्यु का कारण बन सकती है।बताया जा रहा है कि इस बीमारी के परिणाम स्वरूप मछलियों का बल्ड सुख जाता है।वही इसका असर उनकी चमड़ियां और गलफड़ों पर भी पड़ता है।मत्स्य विभाग की टीम द्वारा इस समस्या से निपटने उपाय तो बता दिए गए ।जिसे अमलीजामा पहनाना अब निगम के हाथों में है।
मत्स्य विभाग ने सुझाए तात्कालिक उपाय
कारणों की जांच के उपरांत मत्स्य विभाग ने नगर निगम को तालाब की स्थिति सुधारने के लिए कई आवश्यक उपाय सुझाए हैं, जिनमें तालाब के पानी में चूना डालकर जल की गुणवत्ता सुधारने के साथ ही लाल दवा (पोटैशियम परमैंगनेट) का नियंत्रित छिड़काव कर परजीवियों को समाप्त करता है।वही तालाब से मृत मछलियों को तत्काल बाहर निकालना, ताकि पानी और अधिक दूषित न हो।साथ ही पानी के बदलाव की भी बात कही गई है। जिसके लिए मछलियों को शिफ्ट करने की भी आवश्यकता पड़ेगी।तालाब में अत्यधिक जैविक कचरा और गंदगी की नियमित सफाई भी जरूरी है।
भविष्य में मछली बीज डालने से पहले पानी की जांच अनिवार्य रुप से कराया जाना भी कारगार होगा।
बहरहाल, मत्स्य विभाग की सलाह के बाद अब निगाहें नगर निगम की तत्परता पर टिकी हैं। यदि समय रहते सुझाए गए उपायों को अमल में नहीं लाया गया, तो गणेश तालाब की स्थिति और भी बद से बदतर हो सकती है, जिससे न केवल मछलियों का जीवन संकट में पड़ेगा, बल्कि आसपास के पर्यावरण और आमजन के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
वर्शन/ गणेश तालाब की मछलियों में आरगुलस नाम की बीमारी पाई गई है।साथ ही पानी में ऑक्सीजन की मात्रा का भी अभाव है।जिसे दूर करने चुने और लाल दवा का छिड़काव किया जाना उपयोगी साबित होगा।
सतीश चंद्र गुप्ता
उप संचालक जिला मत्स्य विभाग




