जिला ही नहीं कई प्रांत पार करके बेरोक टोक चला रहे हैवी गाड़ियां, लापरवाही से हर वर्ष बन रहा मौत का सबब
बगैर लायसेंसधारी फोरमेन व ड्राइवर के हाथों भारी भरकम हार्वेस्टर की स्टेयरिंग, लोग गांव रहे है दुर्घटना में जान
रायगढ़।जिले में धान कटाई और मिंजाई को लेकर बड़ी संख्या में हार्वेस्टर मशीन का उपयोग हो रहा है। लोकल गाड़ियों के अलावा बड़ी तादाद में पंजाब, हरियाणा सहित अन्य राज्यों की गाड़ियां पहुंची है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इतनी भारी भरकम मशीन को चलाने वाले अधिकांश फोरमेन और ड्राइवर के पास लायसेंस नहीं है। बगैर लायसेंस ना केवल खेतों में हार्वेस्टर चला रहे है, बल्कि कई जिला और प्रांत पार करके बेरोक टोक गाड़ियों को लाने ले जाने का काम कर रहे है। इस लापरवाही और नवसीखिये वाहन धारियों से आमजन दुर्घटना का शिकार होकर जान गंवा रहे है।
गौरतलब है कि धान कटाई का सीजन शुरू होते ही छत्तीसगढ़ प्रदेश सहित जिले में बडी संख्या में पंजाब, हरियाणा के हार्वेस्टर पहुंच गए है। इसके अलावा स्थानीय स्तर में भी ग्रामीणो की गाड़ियां भी काम पर लगी हुई है, जिनके लगभग सभी स्टाफ पंजाब, हरियाणा से ही है। ऐसे में यदि यातायात नियमों को लेकर देखा जाए तो हार्वेस्टर जैसे भारी भरकम वाहन को चलाने के लिए नियमानुसार हैवी लायसेंस होना आवश्यक है, लेकिन खेत खलिहान ही नहीं बल्कि सड़कों पर धडल्ले से आवाजाही कर रहे हार्वेस्टर की स्टेयरिंग थामने वाले अधिकांश फोरमेन और ड्राइवर के पास हैवी तो दूर लाईट लायसेंस तक नहीं होता। बैगेर लायसेंसधारी चालक, परिचालक इतनी भारी भरकम मशीन को कैसे पार करके ले आते है। वहां पर किस तरह की जांच होती है, यह सब सोचने वाली बात है। बहरहाल कारण चाहे जो भी हो लेकिन दिगर प्रांतों से पहुंची गाड़ियों के अलावा लोकल गाड़ियों को चलाने वाले अधिकांश बाहरी फोरमेन और ड्राइवर बगैर लायसेंस के ही बेखौफ होकर काम कर रहे है। इसका खामियाजा कई बार दुर्घटनाओं के देखने को मिलता है और लोग अमसय काल के आगोश में समाते है
दूसरे राज्यों की करीबी सैकड़ों हार्वेस्टर वाहन
जिले में ही 2 सौ से अधिक गाड़ियां दिगर प्रांतों से पहुंच चुकी है, जो दिन भर खेतों में धान कटाई का काम करने के बाद रात के समय सड़कों पर धडल्ले से दौड़ती रहती है। कटाई के सीजन में जिला सहित पूरे प्रदेश में पंजाब, हरियाणा से बड़ी संख्या में गाड़ियां पहुंचती है, जो ना केवल जिला पार करके बल्कि कई राज्यों की सीमाओं को पार करके आते है। इनमें से कुछेक छोड़ दिया जाए तो अधिकांश लोगों के पास हैवी लायसेंस नही है, जबकि हैवी लायसेंस के बिना हार्वेस्टर को चलाने की अनुमति नहीं होती।
गांव में बाहरी लोगों का जमावड़ा, मुसाफिरी भी नही दर्ज
जिले में धान कटाई और मिंजाई को लेकर बढ़ते हार्वेस्टर के प्रयोग से बाहरी लोगों की आवाजाही भी बढ़ गई है। अमूमन हर गांव में दो-चार दिगर प्रांत की गाड़ियां पहुंची है, जिनके मालिक ही नहीं पूरा स्टाफ पंजाब, हरियाणा, उत्तरप्रदेश सहित अन्य राज्यों के है। नियमानुसार ऐसे लोगों की मुसाफिरी संबंधित थाना क्षेत्रों में दर्ज होनी चाहिए, लेकिन इस पर भी किसी का ध्यान नहीं है। बताया जाता है कि दिगर प्रांत से आने वाले चालक अक्सर यहां के वाहन मालिकों और किसानों को झांसे में लेकर बड़ी रकम ठगी कर जाते है।
एक नजर दुर्घटना से होने वाले चर्चित मौत पर
हार्वेस्टर बैगेर देखे किया पीछे, चारमार में महिला ने गंवाई जान
दो दिन पहले घरघोड़ा थाना क्षेत्र के ग्राम चारमार निवासी सुनंदा गुप्ता पति सफेद गुप्ता (45 वर्ष) शनिवार को दोपहर में हार्वेस्टर से धान कटाई करा रही थी। इस दौरान उसने खेत के कोने में लगे धान फसल को खुद काटकर हार्वेस्टर में डाल रही थी, ताकि फसल नुकसान न हो, इस दौरान खेत के दूसरे छोर पर हार्वेस्टर चल रहा था और महिला अलग छोर में लगे फसल को काट रही, तभी हार्वेस्टर चालक ने लापरवाही पूर्वक वाहन को चलाते हुए तेज गति से वाहन को बैक कर दौड़ाया तो सुंनदा गुप्ता हार्वेस्टर की चपेट में आ गई, इससे उसकी मौत हो गई।
थ्रेशर मशीन पलटने से दो महिलाओं की गई जान
सरिया मे वर्ष 2021 के नवंबर माह में सुबह नौ बजे क्षेत्र के कोसमडीह गांव में ट्रैक्टर से धान कटाई के लिए थ्रेशर मशीन को गांव लाया जा रहा था। इसमें कुछ महिला-पुरूष भी बैठे थे, जो धान कटाई व अन्य कार्य के लिए जा रहे थे। इसी दौरान तेज रफ्तार ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर पास ही एक खेत मे घुस गया। इससे इसमें लोग थ्रेशर मशीन पलट गई और थ्रेसर मशीन में बैठी दोनों महिलाएं अहिल्या मानिकपुरी एवं लता सेठ दब गई। हादसे में अंदरूनी चोट आने की वजह से मौके पर ही दोनों की मौत हो गई।
पैरा हटाते वक्त हार्वेस्टर आपरेटर ने की गलती बुर्जुग की हुई मौत
खरसिया थाना क्षेत्र के भैना पारा गांव में राम श्रीवास (60) अपने खेत में धान की फसल को कटवाने के लिए हार्वेस्टर के चालक के साथ खेत गया था। साथ में उसका बेटा तरुण प्रसाद श्रीवास और बहु घसनिन बाई भी थी। हार्वेस्टर मशीन का चालक खेत के धान फसल को काट रहा था तथा ठाकुर राम श्रीवास हार्वेस्टर के पीछे के पैरा को हटा रहा था, इस बीच हार्वेस्टर का चालक अचानक हार्वेस्टर को बैक कर रहा था। इसी दौरान ठाकुर राम का पैर चक्के में दब गया। हादसे में किसान को अंदरूनी चोंटें भी आई। दुर्घटना के कुछ समय बाद ही ठाकुर राम ने खेत में ही दम तोड़ दिया। यह घटना करीब 7 साल पहले की है।




