पॉलिटेक्निक हॉस्टल की बदहाल व्यवस्था पर छात्रों का आक्रोश, एबीवीपी ने दी आंदोलन की चेतावनी
छत से टपकता पानी, जर्जर भवन और गंदगी से परेशान छात्र; प्राचार्य के बयान ने बढ़ाया विवाद, बोले—दिक्कत है तो हॉस्टल छोड़ दें
रायगढ़। शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज, रायगढ़ के छात्रावास में बुनियादी सुविधाओं की कमी और सुरक्षा संबंधी समस्याओं को लेकर एक बार फिर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। पूर्व में आंदोलन के बाद प्रशासनिक हस्तक्षेप और व्यवस्था सुधारने के आश्वासन के बावजूद स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं आने से छात्रों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। छात्रावास की बदहाली को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए समस्याओं के शीघ्र निराकरण की मांग की है। वहीं, प्राचार्य की ओर से असंतुष्ट छात्रों को हॉस्टल छोड़ने की सलाह दिए जाने के बाद विवाद और गहरा गया है।
विदित हो कि छात्रावास की समस्याओं को लेकर कुछ महीने पहले भी छात्रों ने आंदोलन किया था। उस समय चक्रधर नगर थाना प्रभारी और नायब तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया था। अधिकारियों ने कॉलेज प्रबंधन को व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए थे। इसके बाद समस्याओं के निराकरण का आश्वासन मिलने पर मामला शांत हुआ, लेकिन छात्रों का कहना है कि समय बीतने के बावजूद उनकी शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।छात्रों के मुताबिक, हॉस्टल की छतों पर घास और झाड़ियां उग आई हैं। बारिश के दौरान छतों से पानी टपकता है, जबकि दीवारों में सीलन बनी हुई है। उनका आरोप है कि सीलन के कारण बिजली के करंट का खतरा भी बना रहता है। ऐसे में छात्रावास में रहने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विरोध के बीच प्राचार्य की एक टिप्पणी ने मामले को और तूल दे दिया। छात्रों के मुताबिक, प्राचार्य ने कहा कि जिन्हें हॉस्टल की व्यवस्था से दिक्कत है, वे छात्रावास छोड़ सकते हैं। इस बयान को लेकर विद्यार्थियों और छात्र संगठन में नाराजगी बढ़ गई है।छात्रों का कहना है कि समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें छात्रावास छोड़ने की सलाह देना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि वे किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे, बल्कि रहने के लिए सुरक्षित और बुनियादी सुविधाओं से युक्त वातावरण चाहते हैं।
सात हजार रुपये शुल्क के बदले सुविधाएं कहां?
एबीवीपी पदाधिकारी शिवम मिश्रा ने छात्रावास की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रत्येक छात्र से सालाना करीब सात हजार रुपये लिए जाते हैं, इसके बावजूद जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने छात्रावास के रखरखाव पर खर्च होने वाली राशि का पारदर्शी हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की। साथ ही आरोप लगाया कि पर्याप्त बजट होने के बावजूद भवन और अन्य सुविधाओं की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। उनके अनुसार, छात्रावास का बिजली बिल भी बकाया है।हालांकि, शुल्क और बजट के उपयोग को लेकर लगाए गए इन आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए कॉलेज प्रबंधन का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।
शौचालयों की स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल
छात्रों ने परिसर में साफ-सफाई की कमी को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि शौचालयों में दरवाजे नहीं हैं और खिड़कियों की जालियां टूटी हुई हैं। इसके कारण मच्छरों और मक्खियों के साथ सांप-बिच्छू जैसे जीवों के कमरों में प्रवेश करने का खतरा बना रहता है। छात्रों का आरोप है कि केयरटेकर के समक्ष शिकायत रखने के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो रहा है।विद्यार्थियों का कहना है कि छात्रावास में रहने वाले छात्रों को सुरक्षित वातावरण, स्वच्छता और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलना जरूरी है। इन व्यवस्थाओं की अनदेखी से उनकी पढ़ाई और दैनिक जीवन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
एबीवीपी ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
एबीवीपी ने कॉलेज प्रबंधन से छात्रावास की सभी समस्याओं का समयबद्ध निराकरण करने की मांग की है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो छात्रों के साथ मिलकर आंदोलन तेज किया जाएगा। संगठन ने स्पष्ट किया कि छात्रावास की सुरक्षा, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को अब और नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।अब निगाहें कॉलेज प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल यह है कि पूर्व में दिए गए आश्वासनों के बाद इस बार समस्याओं के समाधान के लिए कोई ठोस पहल होती है या छात्रावास की बदहाली को लेकर विरोध और तेज होगा।




