रायगढ़ में बारिश का कहर: झारमुड़ा शाखा नहर टूटी, 100 एकड़ में लगी फसल बर्बाद
अर्नव तूफान के असर के बीच लगातार बारिश से किसानों पर दोहरी मार, 2 दर्जन से अधिक किसान प्रभावित; धान खरीदी से पहले बढ़ी चिंता
रायगढ़/ अर्नव तूफान के असर के बीच लगातार हो रही बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मौसम की मार के बीच रायगढ़ जिले के ग्राम जकेला स्थित झारमुड़ा शाखा नहर के टूटने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, नहर टूटने और खेतों में पानी भरने से 2 दर्जन से अधिक किसानों की लगभग 100 एकड़ कृषि भूमि में लगी फसल प्रभावित हुई है।
घटना गुरुवार की बताई जा रही है। इसकी सूचना केलो परियोजना विभाग के अधिकारियों को भी दी गई थी। अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और केलो झारमुड़ा शाखा नहर का गेट भी बंद कर दिया। इसके बावजूद शुक्रवार को प्रभावित खेतों में करीब तीन फीट तक पानी भरा नजर आया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब नहर का गेट बंद कर दिया गया था, तो दूसरे दिन भी खेतों में पानी का स्तर कम क्यों नहीं हुआ? दूसरी ओर, विभाग का कहना है कि खेती-किसानी का अंतिम चरण होने के कारण किसानों ने शाखा नहर से पानी लेना बंद कर दिया था। इससे नहर में करीब साढ़े छह क्यूबिक पानी मौजूद था। इसी बीच लगातार दो दिनों से हो रही बारिश के कारण नहर में जलभराव बढ़ा और दबाव के चलते नहर टूट गई। अब फसल को हुए नुकसान के बाद प्रभावित किसान प्रशासन से सर्वे और मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं।ग्राम जकेला स्थित झारमुड़ा शाखा नहर के टूटने की घटना गुरुवार की बताई जा रही है। नहर टूटने से पानी आसपास के खेतों में फैल गया और बड़ी मात्रा में कृषि भूमि जलमग्न हो गई। घटना की सूचना जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को दी गई, जिसके बाद विभागीय अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर स्थल का निरीक्षण किया। विभाग की ओर से एहतियाती कदम उठाते हुए केलो झारमुड़ा शाखा नहर का गेट भी बंद कर दिया गया।हालांकि, नहर का गेट बंद किए जाने के बाद भी प्रभावित खेतों में पानी भरने की समस्या तत्काल दूर नहीं हुई। शुक्रवार को भी खेतों में करीब तीन फीट पानी जमा होने की स्थिति सामने आई।
गेट बंद होने के बाद भी नहीं घटा पानी, उठ रहे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जब गुरुवार को नहर टूटने की सूचना के बाद विभागीय अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण किया और नहर का गेट बंद कर दिया, तो शुक्रवार को भी खेतों में करीब तीन फीट पानी क्यों भरा रहा? गेट बंद करने के बाद भी खेतों में जलभराव बने रहने की स्थिति ने पानी की निकासी और नहर टूटने के बाद किए गए प्रबंधों को लेकर सवाल खड़े किए हैं।लगातार बारिश के कारण आसपास के क्षेत्र में अतिरिक्त पानी जमा होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, खेतों में पानी का स्तर कम नहीं होने की वास्तविक वजह स्पष्ट करने के लिए नहर टूटने वाले स्थान, जलनिकासी की व्यवस्था और प्रभावित खेतों की स्थिति का तकनीकी आकलन आवश्यक है। फिलहाल किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खेतों से पानी निकलने और बची हुई फसल को सुरक्षित रखने की है।
साढ़े छह क्यूबिक पानी और बारिश को विभाग ने बताया कारण
केलो परियोजना विभाग के अनुसार, नहर टूटने के पीछे खेती-किसानी की स्थिति और लगातार बारिश प्रमुख कारण रहे। विभाग का कहना है कि वर्तमान में खेती-किसानी का अंतिम चरण चल रहा है। ऐसे में किसानों ने शाखा नहर से पानी लेना बंद कर दिया था। पानी का उपयोग कम होने के कारण नहर में करीब साढ़े छह क्यूबिक पानी मौजूद था।इसी दौरान पिछले दो दिनों से लगातार हो रही बारिश के चलते नहर में जलभराव बढ़ गया। विभाग के अनुसार, नहर में पहले से मौजूद पानी और बारिश के कारण बढ़े जलस्तर की वजह से नहर पर दबाव बढ़ा, जिसके परिणामस्वरूप नहर टूट गई।
हालांकि, नहर टूटने के तकनीकी कारणों, जलस्तर में हुई वास्तविक वृद्धि और पानी की निकासी की स्थिति को लेकर विस्तृत विभागीय आकलन सामने आना बाकी है।
डेढ़ दर्जन से अधिक किसानों की करीब 100 एकड़ फसल प्रभावित
नहर टूटने का सीधा असर किसानों की कृषि भूमि पर पड़ा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, डेढ़ दर्जन से अधिक किसानों की लगभग 100 एकड़ भूमि में लगी फसल प्रभावित हुई है। खेतों में करीब तीन फीट तक पानी जमा होने से फसल को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है। हालांकि, वास्तविक नुकसान का आकलन खेतवार सर्वे के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।किसानों के लिए यह नुकसान केवल फसल तक सीमित नहीं है। खेती में बीज, खाद, दवाइयों और मजदूरी पर किए गए खर्च के साथ पूरे सीजन की मेहनत दांव पर लग गई है। लगातार बारिश और नहर टूटने से उत्पन्न स्थिति ने किसानों की आर्थिक चिंता बढ़ा दी है। अब प्रभावित किसान चाहते हैं कि प्रशासन जल्द मौके पर पहुंचकर नुकसान का आकलन कराए और राहत उपलब्ध कराने की दिशा में कार्रवाई करे।
वर्सन/झारमुड़ा शाखा नहर के टूटने की जानकारी मिली।अधिकारियों द्वारा स्थित मुआयना कर शाखा नहर का गेट बंद करवा दिया गया है।नहर में साढ़े 6 क्यूबिक पानी मौजूद था दो दिनों से हुई लगातार बारिश और किसानों द्वारा शाखा नहर से पानी लेना बंद करने की वजह से नहर में अधिक जलभराव के कारण नहर टूटने की स्थिति निर्मित हुई।
मनीष गुप्ता
कार्यपालन यंत्री केलो परियोजना विभाग




