खाड़ाबंध तालाब के अस्तित्व पर सवाल, कैनाल रोड निर्माण के बीच गरमा सकता है मुद्दा
कभी 14 एकड़ में फैले जलाशय का बदला स्वरूप, पुराने राजस्व रिकॉर्ड में प्लेट और सीट नंबर भी अलग; नगर निगम की सामान्य सभा में हंगामे के आसार
रायगढ़/, शहर में कैनाल रोड निर्माण के बीच खाड़ाबंध तालाब के अस्तित्व और उसके मूल स्वरूप को लेकर सवाल उठने लगे हैं। कभी करीब 14 एकड़ क्षेत्र में फैले इस तालाब की वर्तमान स्थिति को लेकर चर्चा तेज है। पुराने राजस्व अभिलेखों में दर्ज विवरण और बाद के रिकॉर्ड में सामने आए अलग-अलग प्लेट एवं सीट नंबरों ने इस जलाशय की जमीन की पहचान और उसके बदलाव को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में नगर निगम की आगामी सामान्य सभा में खाड़ाबंध तालाब का मुद्दा गरमाने के आसार हैं। तालाब के संरक्षण को लेकर आदिवासी समाज की ओर से भी विरोध जताए जाने की बात सामने आई है।
यह मामला केवल एक पुराने तालाब तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर के पारंपरिक जलस्रोतों, ऐतिहासिक विरासत और सार्वजनिक भूमि के संरक्षण से भी जुड़ा है। सवाल यह है कि जिस जलाशय का कभी लगभग 14 एकड़ में विस्तार बताया जाता है, उसका वर्तमान स्वरूप क्या है और समय के साथ उसकी जमीन की स्थिति में क्या बदलाव आया? इन सवालों का जवाब पुराने राजस्व रिकॉर्ड और वर्तमान स्थिति के तुलनात्मक परीक्षण से ही सामने आ सकेगा।उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 1957-58 से 1960-61 के रिकॉर्ड में खाड़ाबंध तालाब का उल्लेख प्लेट नंबर 94 और सीट नंबर 3 के संदर्भ में बताया जा रहा है। वहीं, बाद के अभिलेखों में प्लेट नंबर 72 और सीट नंबर 56 का उल्लेख सामने आने की जानकारी है। पुराने और नए रिकॉर्ड में इन विवरणों के अंतर को लेकर अब तालाब की जमीन की पहचान और उसके मूल स्वरूप पर चर्चा हो रही है।क्या निर्माण कार्य से पहले पुराने राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान किया गया था? क्या तालाब की मूल सीमा को ध्यान में रखकर योजना तैयार की गई? यदि जलाशय का क्षेत्रफल घटा है या उसका स्वरूप बदला है, तो इसके पीछे क्या कारण हैं? इन सवालों का जवाब संबंधित विभागों की तकनीकी रिपोर्ट, स्वीकृत नक्शे और राजस्व दस्तावेजों के आधार पर दिया जाना चाहिए।हालांकि, प्लेट और सीट नंबरों में बदलाव का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं है। यह बदलाव सर्वेक्षण, रिकॉर्ड के पुनर्गठन, सीमांकन या किसी अन्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत हुआ है या इसके पीछे कोई दूसरी वजह है, इसकी पुष्टि संबंधित विभाग के मूल अभिलेखों से ही हो सकती है।ऐसे में नगर निगम और राजस्व विभाग को पुराने नक्शों, खसरा-पंजी, भूमि अभिलेखों तथा वर्तमान सीमांकन का मिलान कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इससे तालाब की मूल सीमा, वास्तविक क्षेत्रफल और वर्तमान में जलाशय के रूप में सुरक्षित भूमि की स्थिति सामने आ सकेगी।
राजपरिवार से जुड़ा बताया जाता है तालाब का इतिहास
खाड़ाबंध तालाब को लेकर स्थानीय स्तर पर यह भी बताया जाता है कि इसका राजपरिवार से गहरा संबंध रहा है। जनश्रुति के अनुसार, कभी इस तालाब में राजपरिवार के हथियार धोए जाते थे। यह दावा तालाब के ऐतिहासिक महत्व की ओर संकेत करता है, हालांकि इसकी पुष्टि के लिए प्रमाणित ऐतिहासिक दस्तावेजों या विश्वसनीय स्थानीय स्रोतों की जरूरत होगी।यदि पुराने अभिलेखों और ऐतिहासिक साक्ष्यों से इस संबंध की पुष्टि होती है, तो खाड़ाबंध तालाब का महत्व केवल जलस्रोत के रूप में नहीं, बल्कि शहर की ऐतिहासिक धरोहर के रूप में भी सामने आएगा। ऐसे में इसके संरक्षण का सवाल और महत्वपूर्ण हो जाता है।
कैनाल रोड निर्माण के बीच उठ रहे सवाल
कैनाल रोड निर्माण को शहर की यातायात व्यवस्था बेहतर बनाने और आवागमन सुगम करने की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। लेकिन विकास कार्यों के साथ पुराने तालाबों और प्राकृतिक जलस्रोतों का संरक्षण भी जरूरी है। खाड़ाबंध तालाब को लेकर उठ रहे सवालों के बीच यह स्पष्ट होना चाहिए कि सड़क निर्माण की स्वीकृत योजना का तालाब की जमीन, उसकी सीमा, जल निकासी और प्राकृतिक जल प्रवाह से कोई संबंध है या नहीं।फिलहाल, उपलब्ध जानकारी के आधार पर तालाब के स्वरूप में बदलाव और कैनाल रोड निर्माण के बीच प्रत्यक्ष संबंध की पुष्टि नहीं की जा सकती। ऐसे में तथ्यों की जांच और दस्तावेजों का मिलान महत्वपूर्ण होगा।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप जरूरी है तालाबों का संरक्षण
तालाबों और अन्य पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपने विभिन्न निर्देशों में इनके महत्व तथा सार्वजनिक उपयोग की भूमि की सुरक्षा पर जोर दिया है। जलस्रोतों का मूल स्वरूप और उपयोग प्रभावित होने से पर्यावरणीय संतुलन, जल संचयन और स्थानीय समुदायों के हितों पर असर पड़ सकता है। इसलिए तालाबों की जमीन और उनके स्वरूप में बदलाव से जुड़े मामलों में संबंधित रिकॉर्ड तथा कानूनी स्थिति की जांच जरूरी है।नगर निगम की सामान्य सभा में यह विषय उठता है तो जनप्रतिनिधियों के सामने तालाब के ऐतिहासिक महत्व, पुराने राजस्व रिकॉर्ड और वर्तमान स्थिति पर चर्चा का अवसर होगा।
वर्सन/केनाल रोड निर्माण में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना कर खाबंद तालाब के स्वरूप को ही बदल दिया गया।नजूल विभाग द्वारा भी इसमें अनियमितता बरती गई है।
सलीम नियरिया
नेता प्रतिपक्ष नगर निगम




