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रोजगार के वादे पूरे नहीं होने पर जिंदल सीमेंट फैक्ट्री के गेट पर फिर प्रदर्शन

रोजगार के वादे पूरे नहीं होने पर जिंदल सीमेंट फैक्ट्री के गेट पर फिर प्रदर्शन, सोमवार तक का अल्टीमेटम

दो साल पहले 45 दिनों तक चला था आंदोलन, मौखिक आश्वासन के बाद समाप्त हुआ था धरना; इस बार मांग पूरी नहीं होने पर ग्रामीणों ने उग्र आंदोलन की चेतावनी दी

रायगढ़/ जिंदल कंपनी द्वारा रोजगार सहित अन्य मांगों को पूरा नहीं किए जाने से नाराज ग्राम पंचायत धनागर के ग्रामीणों ने एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाया है। शुक्रवार को ग्रामीणों ने जिंदल सीमेंट फैक्ट्री के मेन गेट के सामने प्रदर्शन किया। इसके बाद कंपनी प्रबंधन, ग्रामीणों और प्रशासन के बीच त्रिपक्षीय वार्ता हुई। वार्ता के दौरान कंपनी प्रबंधन की ओर से सोमवार तक मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई है। ग्रामीणों ने भी स्पष्ट कर दिया है कि निर्धारित समयसीमा में मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी ने उनकी जमीनों का अधिग्रहण कर खरीदारी करते समय रोजगार, गांव के विकास और साफ-सफाई सहित कई शर्तें रखी थीं। इन शर्तों और वादों को पूरा नहीं किए जाने के कारण ग्रामीणों में लंबे समय से नाराजगी है। उनका कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।ग्रामीणों द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन के अनुसार, ग्राम धनागर की जमीनों का अधिग्रहण कर खरीदारी करते समय कंपनी की ओर से गांव के बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने, गांव में विकास कार्य कराने तथा साफ-सफाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने जैसी शर्तें रखी गई थीं। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन संबंधी प्रक्रिया के दौरान इन वादों के आधार पर उनसे सहमति ली गई थी, लेकिन बाद में कंपनी प्रबंधन ने अपेक्षाओं के अनुरूप काम नहीं किया।ग्रामीणों ने आवेदन में यह भी उल्लेख किया है कि कंपनी में स्थानीय युवाओं को नौकरी देने के मामले में वादे पूरे नहीं हुए हैं। उनका दावा है कि प्रत्येक तीन-तीन महीने में गोद ग्राम धनागर के पांच-पांच लोगों को नौकरी देने की बात कही गई थी, लेकिन दो वर्ष के भीतर केवल तीन लोगों को ही रोजगार मिल पाया।ग्रामीणों के मुताबिक, इनमें से एक व्यक्ति को एक वर्ष तक प्रशिक्षण देने के बाद भी स्थायी नहीं किया गया और उसका काम बंद करा दिया गया। ग्रामीणों ने इसे रोजगार के वादे को पूरा नहीं करने का उदाहरण बताते हुए कंपनी से स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता के आधार पर नौकरी देने की मांग की है।

दो साल पहले भी 45 दिनों तक चला था आंदोलन

ग्रामीणों के अनुसार, करीब दो वर्ष पहले भी रोजगार की मांग को लेकर जिंदल कंपनी के मेन गेट के सामने लगातार 45 दिनों तक प्रदर्शन किया गया था। उस समय कंपनी प्रबंधन ने मौखिक आश्वासन देकर मांगों को पूरा करने की बात कही थी, जिसके बाद ग्रामीणों ने आंदोलन समाप्त कर दिया था। ग्रामीणों का कहना है कि उस दौरान दिए गए आश्वासनों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई, जिसके चलते उन्हें दोबारा प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

त्रिपक्षीय वार्ता के बाद सोमवार तक इंतजार

शुक्रवार को फैक्ट्री के मुख्य द्वार के सामने हुए प्रदर्शन के बाद कंपनी प्रबंधन, ग्रामीणों और प्रशासन के बीच त्रिपक्षीय वार्ता हुई। इस वार्ता में सोमवार तक मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिए जाने की बात कही गई है। इसके बाद ग्रामीणों ने फिलहाल निर्धारित समयसीमा तक इंतजार करने की बात कही है।हालांकि, ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि सोमवार तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो वे फिर से आंदोलन तेज करेंगे। ऐसे में अब कंपनी प्रबंधन के सामने स्थानीय ग्रामीणों की नाराजगी दूर करने और पूर्व में किए गए वादों पर अमल करने की चुनौती है।

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