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महानदी का रौद्र रूप, कई एकड़ खेत जलमग्न, धान की फसल पर संकट

महानदी का रौद्र रूप, कई एकड़ खेत जलमग्न; धान की फसल पर संकट



निचले इलाकों में खेतों में भरा पानी; पानी नहीं उतरा तो फसल के तने और पत्ते सड़ने की आशंका



रायगढ़। महानदी के बढ़े जलस्तर ने एक बार फिर तटीय इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। रायगढ़ जिले के पुसौर और सरिया क्षेत्र से लेकर सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के नदी किनारे के गांवों तथा सक्ती जिले के चंद्रपुर क्षेत्र तक कई एकड़ खेत बाढ़ के पानी में डूबे हुए हैं। खेतों में खड़ी धान की फसल लंबे समय तक पानी में रहने के कारण अब सड़ने के खतरे में है। लगातार बारिश और नदी के बढ़े जलस्तर से निचले इलाकों में पानी का फैलाव बढ़ा है, जिससे किसानों की मेहनत पर संकट खड़ा हो गया है।
कलमा बैराज में महानदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने और सभी 66 गेट खुले होने के बाद नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ का असर साफ दिखाई दे रहा है। पुसौर और सरिया क्षेत्र के निचले खेतों में पानी भरने से धान की फसल पूरी तरह पानी में डूबी हुई है। वहीं रानीडीह-पोरथ मार्ग, कोर्रा सहित कई इलाकों में पानी पहुंचने से ग्रामीणों की परेशानी भी बढ़ी है। नदी के आसपास के दूसरे निचले क्षेत्रों में भी खेतों तक बाढ़ का पानी फैल गया है। 2 दिन बीतने के बाद भी हालात सामान्य  धीरे-धीरे हो रही है जिसका असर किसानों के माथे पर नजर आ रहा है उन्हें अब चिंता सताने लगी है कि खेतों में जल भरा होने से
धान तथा अन्य फसलों को इससे भारी नुकसान हो सकता है।



पानी नहीं उतरा तो सड़ सकती है धान की फसल

बाढ़ का पानी खेतों में लगातार जमा रहने से धान के पौधों पर मिट्टी और गाद की परत जमने का खतरा है। लंबे समय तक पानी में डूबे रहने पर पौधों को पर्याप्त हवा नहीं मिलती, जिससे जड़ों पर असर पड़ सकता है और फसल के सड़ने की आशंका बढ़ जाती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पानी जितनी जल्दी खेतों से निकले, फसल को उतना ही कम नुकसान होगा। किसानों को पानी उतरने के बाद खेतों की स्थिति देखने और फसल में रोग के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विभाग से सलाह लेने की जरूरत है।

तत्काल सर्वे और मुआवजे की मांग

बाढ़ से प्रभावित किसानों ने खेतों का तत्काल सर्वे कराकर फसल क्षति दर्ज करने और नियमानुसार राहत व मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद वास्तविक नुकसान सामने आएगा, इसलिए प्रभावित खेतों का सर्वे जल्द कराया जाना जरूरी है। इधर दूसरी ओर सरकार ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और फसलों का सर्वे करने का निर्देश भी दिया है इसके साथ ही प्रभावितों को 10-10 हजार रुपए देने की घोषणा भी की गई है।

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