छह माह में 169 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण, 97 खाद्य नमूने जांच के लिए भेजे
20 नमूनों की रिपोर्ट में 7 फेल, जांच में देरी से उपभोक्ताओं की सेहत पर खतरा; कार्रवाई भी प्रभावित
रायगढ़/ त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की शुद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर खाद्य सामग्रियों के नमूने जांच के लिए भेजे जाते हैं। इसके बावजूद जांच रिपोर्ट आने में होने वाली देरी खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है। अप्रैल से सितंबर तक छह माह के दौरान जिले में 169 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर 97 संदिग्ध खाद्य नमूने जांच के लिए भेजे गए। इनमें से अब तक केवल 20 नमूनों की जांच रिपोर्ट सामने आई है, जिनमें 7 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। यानी जिन नमूनों की रिपोर्ट प्राप्त हुई, उनमें से एक तिहाई से अधिक नमूने फेल पाए गए हैं। वहीं, शेष नमूनों की जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जांच में फेल पाए गए नमूनों में एक मामला असुरक्षित खाद्य सामग्री से संबंधित बताया जा रहा है, जबकि दूसरा मामला कंपाउंडिंग से जुड़ा है। हालांकि, इन प्रकरणों की विस्तृत प्रकृति और शेष नमूनों के संबंध में अंतिम स्थिति संबंधित जांच रिपोर्ट एवं विभागीय अभिलेखों से ही स्पष्ट हो सकेगी। खाद्य पदार्थों में मिलावट, गुणवत्ता में कमी, गलत लेबलिंग अथवा असुरक्षित सामग्री की बिक्री जैसे मामले सीधे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और उनके अधिकारों से जुड़े हैं। ऐसे में केवल नमूने लेना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि समय पर जांच रिपोर्ट प्राप्त कर नियमानुसार कार्रवाई करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।जांच रिपोर्ट में देरी का असर केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित नहीं रहता। जब किसी प्रतिष्ठान से खाद्य सामग्री का नमूना लेकर जांच के लिए भेजा जाता है, तब तक संबंधित उत्पाद की बिक्री जारी रह सकती है। यदि जांच रिपोर्ट आने में लंबा समय लग जाता है और बाद में नमूना असुरक्षित अथवा मानकों के विपरीत पाया जाता है, तो इस बीच बड़ी मात्रा में संबंधित सामग्री उपभोक्ताओं तक पहुंच चुकी हो सकती है। ऐसी स्थिति में बाद में की गई कार्रवाई उपभोक्ताओं को पहले ही हो चुके संभावित नुकसान की भरपाई नहीं कर सकती।विभागीय कार्रवाई का उद्देश्य केवल नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों पर जुर्माना लगाना नहीं, बल्कि बाजार में सुरक्षित खाद्य सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी है।
रिपोर्ट आने में महीनों का इंतजार
खाद्य सुरक्षा से संबंधित नियमों के तहत नमूनों की जांच निर्धारित प्रक्रिया और समय-सीमा के अनुसार की जानी चाहिए। सामान्यतः खाद्य नमूनों की प्रयोगशाला जांच के परिणाम 14 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने का प्रावधान बताया जाता है। इसके विपरीत, जिले में नमूने भेजे जाने के बाद रिपोर्ट मिलने में महीनों लगने की बात सामने आ रही है। इसकी एक प्रमुख वजह स्टॉक एनालिस्ट की कमी बताई जा रही है। हालांकि, संबंधित प्रयोगशाला और विभागीय अधिकारियों से इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
त्योहारों में बढ़ जाती है जिम्मेदारी
त्योहारी सीजन में मिठाइयों और अन्य खाद्य सामग्रियों की मांग बढ़ जाती है। मांग बढ़ने के साथ ही बाजार में मिलावट अथवा घटिया गुणवत्ता वाली सामग्री की आशंका को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। ऐसे समय में प्रतिष्ठानों का निरीक्षण, खाद्य नमूनों का संग्रहण और उनकी प्रयोगशाला जांच तेजी से होना जरूरी है। यदि नमूने लेने के बाद रिपोर्ट आने में ही लंबा समय लग जाए, तो निरीक्षण की प्रभावशीलता सीमित हो सकती है।त्योहारों के दौरान उपभोक्ता बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री खरीदते हैं। ऐसे में संदिग्ध खाद्य पदार्थों की समय रहते पहचान और उनके संबंध में कार्रवाई करना आवश्यक है, ताकि किसी संभावित खतरे को बढ़ने से पहले रोका जा सके।
वर्सन/ दीपावली के शेड्यूल बनाकर जांच की जाएगी। दुकानदार मिलावटी खाद्यान्न सामग्री बिक्री से परहेज करे।जांच में गड़बड़ी पाई जाने ओर कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
अनिल जगत
सी एम एच ओ




