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जन्माष्टमी पर भक्तिमय हुआ रायगढ़, मंदिरों में सजी मनमोहक झांकियां, उमड़ा श्रद्धालुओं का जन सैलाब

जन्माष्टमी पर भक्तिमय हुआ रायगढ़, मंदिरों में सजी मनमोहक झांकियां, उमड़ा श्रद्धालुओं का जन सैलाब


रायगढ़। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी को लेकर रायगढ़ शहर पूरी तरह कृष्णमय नजर आया। शहर के गौरी शंकर मंदिर, श्री श्याम मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों और धार्मिक स्थलों में विशेष पूजा-अर्चना, आकर्षक झांकियों और भक्ति कार्यक्रमों का आयोजन हुआ । देर रात तक मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही और “हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा l रायगढ़ की जन्माष्टमी केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान बन चुका ऐतिहासिक उत्सव है। इसकी सबसे पुरानी और प्रमुख परंपरा गौरीशंकर मंदिर से जुड़ी है। उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, सेठ किरोड़ीमल ने गौरीशंकर मंदिर के निर्माण की पहल 1946 में की थी और मंदिर में 1948 के आसपास प्राण-प्रतिष्ठा हुई। इसके बाद जन्माष्टमी और झूला उत्सव की परंपरा विकसित हुई। मथुरा-वृंदावन की तर्ज पर सात दशकों से अधिक समय से मनाई जा रही रायगढ़ की जन्माष्टमी आज शहर की आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता की ऐतिहासिक पहचान बन चुकी है।

गौरी शंकर मंदिर में विशेष आयोजन

गौरी शंकर मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी आकर्षक झांकियां सजाई गईं। मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी सजावट और रोशनी से सजाया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। बाल गोपाल के जन्म के समय विशेष आरती और जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा।

श्याम मंदिर में दिखी भक्ति की भव्यता

श्री श्याम मंदिर में भी जन्माष्टमी को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप और कृष्ण लीला पर आधारित मनमोहक झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर दर्शन किए। जन्म के निर्धारित समय पर आरती और जयकारों के साथ भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण का स्वागत किया।

शहर के अनेक स्थानों पर सजी कृष्ण झांकियां

जन्माष्टमी के अवसर पर रायगढ़ के विभिन्न मोहल्लों, मंदिरों और सामाजिक संगठनों द्वारा भी आकर्षक झांकियां सजाई गईं। कहीं बाल कृष्ण की माखन चोरी, तो कहीं गोवर्धन पर्वत, गोकुल और वृंदावन की झांकी लोगों का मन मोहती नजर आई। बच्चों ने श्रीकृष्ण और राधा के स्वरूप में सजकर कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। कई स्थानों पर दही-हांडी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया।

जगह-जगह भंडारे, श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद

जन्माष्टमी के पर्व पर शहर में धार्मिक आयोजनों के साथ सेवा और प्रसाद वितरण का सिलसिला भी चला। विभिन्न मंदिर समितियों, सामाजिक संस्थाओं और श्रद्धालुओं द्वारा भंडारे एवं प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। आयोजकों ने श्रद्धालुओं की सुविधा और व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम किए।

कृष्णमय हुआ पूरा रायगढ़

जन्माष्टमी की रात रायगढ़ का माहौल पूरी तरह कृष्ण भक्ति में रंगा नजर आया। मंदिरों में घंटियों और भजनों की गूंज, आकर्षक विद्युत सजावट, कृष्ण-राधा की झांकियां और श्रद्धालुओं की आस्था ने पर्व की भव्यता बढ़ा दी। आधी रात जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का क्षण आया, मंदिरों में शंख-घंटे बज उठे और जय श्रीकृष्ण के जयकारे गूंजने लगे।

रायगढ़वासियों ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को श्रद्धा, उल्लास और सामाजिक एकता के साथ मनाते हुए प्रेम, सेवा और सद्भाव का संदेश दिया।

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