5 सितंबर को मनाया जाएगा श्री जाहर्वीर गोगा बाबा का भव्य जन्मोत्सव
कायाघाट मिट्ठूमुड़ा रोड स्थित गोगा मेड़ी मंदिर पहुंचकर बाबा के जन्मोत्सव में हों शामिल
जनकर्म न्यूज | रायगढ़। सर्पों के देवता, वीर योद्धा व लोक पूज्य देवता श्री जाहर्वीर गोगा बाबा का पावन जन्मोत्सव भाद्रपद कृष्ण पक्ष नवमी, शनिवार 5 सितंबर 2026 को कायाघाट मिट्ठूमुड़ा रोड रायगढ़ स्थित गोगा मेड़ी मंदिर में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ धूमधाम से मनाया जाएगा।
जन्मोत्सव के अवसर पर मंदिर परिसर में बाबा की विशेष पूजा-अर्चना एवं श्रृंगार किया जाएगा। सुबह से ही श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने का सिलसिला शुरू होगा। भक्तजन बाबा के दर्शन कर पूजन, ज्योत एवं प्रसाद अर्पित कर सुख-समृद्धि एवं परिवार की मंगलकामना करेंगे।
निशान यात्रा के साथ होगा जन्मोत्सव का शुभारंभ
जन्मोत्सव के अवसर पर निशान यात्रा द्वारा गोगा मेड़ी से पूजा-अर्चना कर यात्रा प्रारंभ होगी और गोगा मंदिर पहुंचेंगी। उत्सव की जानकारी बापोड़िया परिवार के प्रमुख एवं पूर्व सभापति सदस्य सुरेश गोयल, पार्षद ने दी है।
उन्होंने बताया कि इस अवसर पर मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन एवं धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष प्रोजेक्टर के माध्यम से लाइव टेलीकास्ट दिखाने की व्यवस्था भी की गई है। बाबा के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में मंदिर को आकर्षक रूप से सजाया गया है तथा श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था भी की गई है।
जीवन परिचय एवं इतिहास
रायगढ़ में श्री गोगा मेड़ी मंदिर लगभग सन 1955 के आसपास बापोड़िया परिवार के मुखिया श्रद्धेय शिव करण बापोड़िया जी ने श्री गोगा की मेड़ी राजस्थान से ईंट लाकर स्थापना की है। लोक मान्यता व आस्था का केंद्र होने के कारण लोग अपनी मनोकामनाएं हेतु रायगढ़ जिला सहित दूर-दूर से यहां दर्शन के लिए आते हैं तथा राखी चढ़ाने की परंपरा भी है।
श्री गोगाजी बाबा का जन्म भाद्रपद शुक्ल नवमी को ददरेवा वर्तमान चूरू जिला, राजस्थान में हुआ था। उनके पिता का नाम जेवरसिंह और माता का नाम बाछल देवी है। गोगाजी को विशेष रूप से नाग देवता या सर्पों के देवता के रूप में पूजा जाता है। उनकी प्रतिमा में सामान्यतः उन्हें घोड़े पर सवार, हाथ में भाला लिए हुए तथा गले में सर्प के साथ दिखाया जाता है।
वीर योद्धा के रूप में प्रसिद्ध हैं गोगाजी
श्री जाहर्वीर गोगाजी, जिन्हें गोगाजी चौहान, गोगा जी, जाहिर पीर और गोगा पीर के नाम से भी जाना जाता है, राजस्थान के प्रमुख लोकदेवताओं में से एक हैं। लोकपूज्य देवता होने के साथ-साथ वीर योद्धा के रूप में भी वे प्रसिद्ध हैं। गोगाजी का समय लगभग 11वीं शताब्दी माना जाता है। राजस्थान के आधिकारिक स्रोतों में उन्हें महमूद गजनवी के समकालीन बताया गया है। लोकपरंपरा में वे एक महान योद्धा और अपनी भूमि तथा गौ-रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले वीर के रूप में वर्णित हैं। लोक कथाओं में उनके गुरु के रूप में गुरु गोरखनाथ जी का उल्लेख मिलता है, जिनसे आध्यात्मिक व सिद्ध परंपरा का ज्ञान प्राप्त कर जनकल्याण में लगा दिए थे।
गोगामेड़ी का धार्मिक महत्व एवं मान्यता
गोगाजी की प्रमुख समाधि गोगामेड़ी, हनुमानगढ़ में मानी जाती है। यह स्थान आज राजस्थान का महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। गोगामेड़ी मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता धार्मिक सद्भाव है। गोगाजी बाबा के संबंध में प्रमुख लोक-आस्थाएं हैं कि उन्हें सर्पों के देवता के रूप में पूजा जाता है। सर्पदंश और सर्पों से रक्षा के लिए उनकी पूजा करने की लोकमान्यता है।
उन्हें वीरता, साहस और धर्म की रक्षा का प्रतीक माना जाता है। राजस्थान के अनेक गांवों में ‘गोगाजी का थान’ स्थापित होता है। हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदायों में उनकी श्रद्धा देखने को मिलती है। गोगा नवमी के अवसर पर गोगामेड़ी में विशाल मेला लगता है।
रायगढ़ सहित अन्य राज्यों से भी पहुंचते हैं श्रद्धालु
रायगढ़ के साथ-साथ अन्य जिलों व राज्यों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। लोकपरंपरा और धार्मिक सद्भाव की यह महत्वपूर्ण मिसाल है। बापोड़िया परिवार के प्रमुख सदस्य, नगर निगम रायगढ़ के पूर्व सभापति एवं वर्तमान पार्षद सुरेश गोयल ने आगे बताया कि श्री जाहर्वीर गोगा बाबा लोक आस्था एवं श्रद्धा के प्रमुख केंद्र हैं।
जन्मोत्सव के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए मंदिर परिसर में दर्शन एवं पूजा की उचित व्यवस्था की गई है। उन्होंने आगे बताया कि रायगढ़ शहर एवं आसपास के सभी श्रद्धालुओं से सपरिवार गोगा मेड़ी मंदिर पहुंचकर श्री जाहर्वीर गोगा बाबा के जन्मोत्सव में शामिल होने तथा बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की है।




