रेंगालपाली में केलो नदी का सीना छलनी, हजारों ट्रॉली रेत डंप होने का आरोप
खनिज विभाग कार्यवाही के नाम पर मौन, कार्यवाही या सिर्फ दिखावा….?
रायगढ़/ जिले के रेंगालपाली क्षेत्र में केलो नदी से अवैध रेत उत्खनन और तस्करी का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार केलो नदी घाट में लंबे समय से अवैध तरीके से रेत निकालने का काम जारी है। आरोप है कि उड़ीसा से पोकलेन मशीनें किराए पर लाकर नदी के भीतर और किनारों पर बड़े पैमाने पर उत्खनन किया जा रहा है, जबकि जिम्मेदार विभाग इस पूरे मामले पर मौन साधे हुए हैं।
गौरतलब हो कि नदी किनारे भारी मशीनों की सहायता से रेत उत्खनन का कार्य धड़ल्ले से जारी है।विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक केलो नदी से पोकलेन मशीनों के माध्यम से निकाली गई रेत को नदी किनारे तथा कांदागढ़-बोड़ाझरिया स्थित नर्सरी मुक्तिधाम के समीप अवैध रूप से डंप किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यहां करीब 5 हजार से अधिक ट्रॉली रेत जमा की गई है। यदि यह दावा सही है तो यह अवैध भंडारण का एक बड़ा मामला माना जाएगा, जिससे शासन को लाखों रुपये के राजस्व की क्षति होने की आशंका है। खनिज विभाग समय-समय पर रेत तस्करों के खिलाफ कार्रवाई के दावे तो करता है, लेकिन रेंगालपाली क्षेत्र में महीनों से चल रहे इस कथित अवैध उत्खनन पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। यही कारण है कि विभाग की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का आरोप है कि यदि नियमित निरीक्षण और प्रभावी कार्रवाई की जाती तो नदी के भीतर इतनी बड़ी मात्रा में उत्खनन और भंडारण संभव नहीं हो पाता।वही कार्यवाही के अभाव में पर्यावरणीय क्षति भी हो रही है। जिससे भविष्य में कटाव, जलस्तर में गिरावट और आसपास के क्षेत्रों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।बहरहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कथित तौर पर लंबे समय से अवैध उत्खनन और भंडारण की गतिविधियां जारी हैं, तब संबंधित विभागों द्वारा अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
कार्यवाही या सिर्फ दिखावा?
खनिज विभाग द्वारा जिले में अवैध रेत उत्खनन और तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए समय-समय पर कार्रवाई किए जाने के दावे किए जाते हैं। विभागीय टीम द्वारा रेत से भरे वाहनों की जांच, जब्ती और चालानी कार्रवाई भी की जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात कुछ और ही तस्वीर बयां कर रहे हैं। यही वजह है कि विभाग की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं और इसे केवल औपचारिकता तक सीमित बताया जा रहा है।ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी खुलेआम अवैध रेत उत्खनन, परिवहन और डंपिंग का कारोबार जारी है। कई स्थानों पर रात के अंधेरे से लेकर दिन के उजाले तक नदी घाटों से मशीनों के माध्यम से रेत निकाली जा रही है ।




