Monday, December 23, 2024
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बैगेर योजना 78 लाख की लागत से शहर सरकार निगम प्रशासन ने केलो नदी में चौपाटी बनाने में फूंक दिए 30 लाख

केलो नदी डुबान क्षेत्र में योजना को बैगेर परमिशन के बनाना पड़ा भारी,आपत्ति के बाद डेढ़ साल से काम बंद

मैरीन ड्राइव में चौपाटी बनाने की योजना राजनीतिक उपलब्धि लेने के चक्कर मे जनता की राशि बर्बाद

रायगढ़ (जनकर्म न्यूज़) मरीन ड्राइव में न्यू चौपाटी के नाम पर शहर सरकार ने परिषद से अनुमति लेने की जगह एमआईसी से इसे स्वीकृत कराकर डेढ़ से दो साल पहले आनन फानन में काम शुरू करवा दिया लेकिन केलो नदी तट पर काम होता देख जल संसाधन विभाग ने आपत्ति जताई तो काम रोकना पड़ गया और उसके बाद से साल भर से काम बंद पड़ है। अब शासन के 30 लाख रुपए बर्बाद हो गए तो महापौर व एमआईसी सदस्य इसमें कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं।

दरअसल शनि मंदिर मरीन ड्राइव में इंटकवेल के पास नदी तट पर शहर सरकार चौपाटी बनाना चाह रही थी। ताकि लोग शांत वातावरण में यहां आकर इसक लुत्फ उठा सकें। शहर सरकार ने बिना कार्ययोजना के जल्दबाजी में प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया। महापौर और एमआईसी के सदस्य स्वयं स्थल निरीक्षण करने पहुंचे और स्थान उचित लगने पर तीन चौपाटी निर्माण के लिए 80 लाख का स्टीमेट बनाया गया। इसके बाद सालभर पूर्व बकायदा तामझाम के साथ इसका टेंडर भी निकाला गया। इसमें से दो टेंडर रायगढ़ के अभिषेक कंस्ट्रक्शन (संजय अग्रवाल) व एक टेंडर आयुष कंस्ट्रक्शन (विशाल जैन) को मिला। इसके बाद नगर निगम द्वारा तीनों पचड़ी (चौपाटी) निर्माण के लिए कुल 78 लाख का वर्क ऑर्डर जारी किया। जल संसाधन विभाग से बिना परमिशन लिए केलो नदी में हो रहा था। 2 साल बीतने को है लेकिन मरीन ड्राइव में बन रहे चौपाटी काम में ग्रहण लगा हुआ है जिसके चलते यह काम बंद है इसका सीधा असर निगम के राजस्व कोष पर पड़ा है। यहां यह भी बताना लाजमी होगा कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार थी, भाजपा सरकार में आते ही कांग्रेस सरकार के कार्यकाल विभिन्न कार्यो को समीक्षा तथा जांच करवा रही ताकि सरकारी व जनता की राशि के दुरपयोग का जांच हो सके ।

बिना कार्ययोजना के एमआईसी से मिल गई स्वीकृति

शहर सरकार चौपाटी बनाने का सपना दिखाया और निर्माण कार्य आरम्भ किया वह क्षेत्र केलो नदी का डूबान क्षेत्र है। हल्की बारिश में डेम के गेट खुलने पर वैसे ही वो इलाका जलमग्न हो जाता है। निर्माण से पूर्व शहर सरकार और एमआईसी के किसी सदस्य ने इसके बारे में भी नहीं सोचा। कुल मिला कर बिना प्लानिंग के ही एमआईसी में इसकी स्वीकृति भी मिल गई, जिसका नतीजा यह निकला कि शासन के लाखों रुपए बर्बाद हो गए और अब काम बंद हैं ।इससे जनता का टेक्स का राशि बर्बाद हो गया।

जनता के राशि की दुरपयोग, आखिर जिम्मेदार कौन

शहर सरकार ने नदी के किनारे चौपाटी बनाए जाने की योजना को एमआईसी से स्वीकृत कराया पर परिषद में नहीं लाया। इसलिए इस मुद्दे पर आम राय नहीं हो पाई। शहर सरकार ने निर्माण के पूर्व मौके का तकनीकी अध्ययन ही नहीं किया कि केलो डेम के गेट खुलने व बारिश के समय कहीं चौपाटी डूब तो नहीं जाएगी। इसके अलावा बिना सिंचाई विभाग से अनुमति लिए ही आनन-फानन में सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए शासन की राशि का दुरुपयोग किया। वही जनता के राशि की दुरपयोग में आखिर जिम्मेदार कौन है यह यक्ष का सवाल है।

वसूली को लेकर ठेकेदार और विपक्ष भी लामबंद

इस मसले को लेकर नगर निगम के जनप्रतिनिधियों द्वारा उपलब्धि लेने के चक्कर मे जनहित और नियमो को दरकिनार करना बता रहे है। वही इस कार्य को लिए ठेकेदार ने इस पर बताया कि इस कार्य को लेकर बुरी तरह फंस गए हैं। दरअसल चौपाटी निर्माण ठेकेदारों को पूरा भुगतान भी नहीं हो पाया है। वर्तमान में इनका टीडीआर, जमा राशि भी फंस गई है। न तो निगम उसे वापस कर रहा है और न ही काम करना है या नहीं इस बारे में कुछ स्पष्ट रूप से बताया जा रहा है। यही वजह है कि रकम फंस जाने से ठेकेदार परेशान है।

जनता के पैसे से हो सकती थी दूसरा जनहित का कार्य

देखा जाए तो नगर निगम में 48 वर्ड आते हैं इन वार्डो में वह जनहित व अन्य विकास कार्य का पुलिंदा नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी तथा सरकार के मंत्रियों तथा महापौर के समक्ष आते रहते हैं।ताकि उनके वार्ड में विकास हो सके। इधर 30 लाख रुपये बर्बाद होने के उपरांत
शहरवासियों की मानें तो इतने पैसे में शहर में जो जरूरी विकास कार्य हैं वो पूरे हो जाते। अब शासन के इस राशि की भरपाई आखिर कौन करेगा यह सबसे बड़ा सवाल है?

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