Wednesday, March 4, 2026
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यूनेस्को द्वारा जारी विश्व धरोहर की अस्थाई सूची में छत्तीसगढ़ की कांगेर वैली शामिल:- ओपी चौधरी

यूनेस्को द्वारा जारी विश्व धरोहर की अस्थाई सूची में छत्तीसगढ़ की कांगेर वैली शामिल:- ओपी चौधरी

ओपी ने कहा पर्यटन एवं वन्य जीव संरक्षण की दिशा में छत्तीसगढ़ नई सफलता की ओर बढ़ रहा

रायगढ़ :-जैव विविधता और दुर्लभ जीव जंतुओं के लिए विख्यात छत्तीसगढ़ स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को यूनेस्को ने विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में स्थान दिए जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक रायगढ़ एवं वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा पर्यटन एवं वन्य जीव संरक्षण की दिशा में छत्तीसगढ़ नई सफलता की ओर बढ़ रहा है। विदित हो कि कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान विश्व धरोहर की दौड़ में शामिल हो गया है। यूनेस्को द्वारा जारी पहली सूची में कांगेर वैली को शामिल किया गया। नेशनल पार्क पात्रता हासिल करने वाली कांगेर वैली छत्तीसगढ़ की पहली वैली है। कांगेर वैली समृद्ध जैव विविधता के साथ जीव जंतुओं की दुर्लभ प्रजातियों के आवास के रूप में पहचानी जाती है।
बस्तर के कांगेर घाटी नेशनल पार्क को यूनेस्को ने मंगलवार को 2025 की वर्ल्ड हेरिटेज साइट की तदर्थ सूची में शामिल कर लिया है। अब वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा हासिल करने के लिए राज्य सरकार आगामी एक अपना दावा पूरे तथ्यों के साथ पेश करेगी। कांगेर घाटी को टेंटेटिव लिस्ट में भी शामिल किया जाना भी बहुत बड़ी उपलब्धि है।छत्तीसगढ़ में पहली बार किसी साइट को यह अवसर मिला है। इस संबंध में जानकारी देते हुए ओपी ने कहा 200 वर्ग किमी में फैले कांगेर घाटी नेशनल पार्क में बहुत ही विशेषताएं मौजूद है। यूनेस्को ने अपनी वेबसाइट पर इस आशय की घोषणा कर दी है। सूची में स्थान पाना प्रथम चरण है। इस हेतु साल भर की तैयारी और रिसर्च, पुरातत्व विभाग समेत कई विभागों की शोध के आधार पर वर्ल्ड हेरिटेज साइट के लिए नेशनल पार्क का प्रस्ताव यूनेस्को को भेजा गया था। स्थाई स्थान पाने लिए सांस्कृतिक पुरातत्व सहित अन्य बिंदुओं को शामिल किया गया है। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान की खासियत बताते हुए वित्त मंत्री ओपी ने कहा पार्क की जैव विविधता सबसे बड़ी उपलब्धि है। यह वैली पहाड़ी मैना के लिए प्राकृतिक आवास की तरह है ये मैना इंसानों की तरह बोल सकती है। पार्क में कोटमसर समेत लाइम स्टोन की 16 प्राकृतिक गुफाएं हैं। ये गुफाएं लाखों साल पुरानी हैं और खास बात ये है कि ये जीवित गुफाये देश के बाकी हिस्सों की गुफाओं से पृथक हैं। चूना पत्थरों की नई संरचनाओं का निर्माण जारी है। इस गुफाओं में अंधी मछलियों से लेकर बहुत तरह के जीव जंतु मौजूद है।
पार्क में मौजूद धुरवा आदिवासी अपने साथ हजारों सालों की सभ्यता समेटे हुए हैं और इस जंगल को संरक्षित करने में अपना योगदान दे रहे हैं।

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