नगर निगम में कौन संभालेगा नेता प्रतिपक्ष का दायित्व,
सभापति चुनाव कांग्रेस लड़ेगी या देगी वाकवार रायगढ़
नगर निगम में भाजपा के 33 सीट जितने के बाद दो महत्वपूर्ण पदों सभापति और नेता प्रतिपक्ष के लिए चर्चाओं का दौर आरंभ
विकास, आरिफ, लक्ष्मी साहू के साथ सलीम और जयंत भी नेता प्रतिपक्ष की रेस में वही सभापति को लेकर नामों में उहापोह

रायगढ़। छत्तीसगढ़ गठन होने के बाद रायगढ़ में निकाय बीजेपी का जबरदस्त प्रदर्शन रहा है। जिसमें पहले ही दो सीट पर निर्विरोध निर्वाचन इसके पश्चात चुनाव से जीत के लय को बरकरार रखने चुनाव के चुनावी चुनौती में मतगणना में 33 सीट अपने झोली में डाल दिए। ऐसे में नेता प्रतिपक्ष के साथ अब सभापति के लिए दावेदारी की चर्चाओं दौर चल रहा है। आलम यह है कि कांग्रेस से नेता प्रतिपक्ष के लिए विकास ठेठवार, अमृत काटजू,आरिफ हुसैन,लक्ष्मी साहू का नाम आगे आ रहा है। इसके अलावा सभापति के वाक ओव्हर की स्थिति की चर्चा आम है, जबकि कांग्रेस के अंदरखाने से सलीम जयंत का नाम पैनल में चल रहा है।
नगर निगम चुनाव में बंफर जीत का शोर बीजेपी के खेमे के थमा नही है। जीत का जश्न में पार्षद सरोबर है। एक तरफ भाजपा कमोबेश सधी हुई राजनीति कर रही है। इसका परिणाम भी उन्हें बेहतर मिल रहा है। नगरीय निकाय चुनाव के परिणाम के बाद अब रायगढ़ नगर निगम में सभापति और नेता प्रतिपक्ष के नामों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। दोनों मुख्य पार्टियों से तीन से चार नाम ऐसे हैं, जो सभापति और नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में शामिल हैं। सभापति के पद के लिए प्रमुख रूप से तीन नामों की चर्चा हो रही है। इनमें सुरेश गोयल, पूनम सोलंकी और डिग्री साहू का नाम सामने आ रहे हैं। सुरेश गोयल, जो पिछले करीब 45 सालों से राजनीति में सक्रिय हैं, वे तीन बार पार्षद और एक बार सभापति का प्रभार संभाल चुके हैं। इसके अलावा वे नगर पालिका में नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं। कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष के लिए आधा दर्जन नाम सामने आ रहे है प्रमुख तौर पर युवा नेता आरिफ हुसैन है। आरिफ दूसरी बार चुनाव जीतकर आए है। लक्ष्मी साहू 4 बार पार्षद बने है, विकास ठेठवार भी इसी कतार में है। जबकि सलीम नियारिया और जयंत भी शामिल हैं ये दोनों 7 वीं बार चुनाव जीतकर आए है। दोनो वरिष्ठ भी है। यही वजह है कि नाम प्रमुख है। जयंत पूर्व में भी नेता प्रतिपक्ष रह चुके है। अनुभव भी इस लिहाज से काफी है।हांलाकि की जयंत स्वास्थ्य गत समस्याओं के चलते संभावना दूरी बनाने को लेकर राजनीतिक गलियारो में चल रहा है। सलीम नियारिया प्रतिपक्ष और सभापति चुनाव पर पार्टी निर्णय पर अपना वक्तव्य देकर किनारा किए है। कुल मिलाकर कांग्रेस पार्टी में नेता प्रतिपक्ष के लिए पांच प्रमुख नाम है हालांकि सभापति चुनाव के लिए वाकवार से जूझ रही है।
बहरहाल 8 मार्च को शपथ ग्रहण होने के बाद कई मायने में दोनों पदों के लिए कांग्रेस में परिस्थितियों का स्पष्ट होना तय माना जा रहा है।
सभापति चुनाव में हारने की आशंका से नाम भी पीछे होने लगे
सभापति के लिए संख्या बल का होना काफी महत्वपूर्ण रहता है। कांग्रेस के पास 13 पार्षद हैं। एक निर्दलीय और एक बसपा है। इनका समर्थन मिलना संसय में है। इन्हें साथ भी ले लिया जाए तो सभापति के जादूई आंकड़े तक पहुच पाना कठिन होगा। जबकि बीजेपी बहुमत में है। 33 पार्षद होने के साथ निर्दलीय और बसपा का भी समर्थन मिलना सत्ता रूठ पार्टी के चलते तय बताई जा रही हैं। यही वजह है कि कुछ नेता इस चुनाव से अन्दुरुनी तौर पर दूरी बनाने रहे है। इस लिहाज से कांग्रेस की आगे की रणनीति क्या होगी यह दिलचस्प होगा या फिर वाक वार की परिस्थिति उपजेगी।
गली मोहल्ले में सभापति एवं नेता प्रतिपक्ष को लेकर चर्चाओं का बाजार है गरम
वर्तमान परिस्थितियों में भाजपा मजबूत स्थिति में है। बीजेपी में सभापति को लेकर पर्यवेक्षक द्वारा नाम का पैनल लेकर भी चले गए हैं नाम की सहमति पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी की भी महत्वपूर्ण होगा । इस बीच अपने-अपने नेताओं के समर्थक अपने नेताओं को सभापति की कुर्सी दिलाने और पाने की परिस्थितियों में आश्वस्त है। यही वजह है कि यह चर्चा आम हो गई है। गली मोहल्ले में सभापति और नेता प्रतिपक्ष को लेकर कई तर्क वितर्क के साथ लोगो में चल रहा है।




