रायगढ़ में बढ़ रहा डॉग बाइट का खतरा, दो साल में 4,800 से ज्यादा मामले महीने में तीन सौ,
रोज 10 से अधिक लोग हो रहे शिकार, निगम के इंतजाम नाकाफी, बच्चे, बुजुर्ग और महिलाओं को अधिक होता है खतरा
रायगढ़/ शहर में इन दिनों आवारा कुत्तों का आतंक बढ़ता नजर आ रहा है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग लगातार इनके शिकार बन रहे हैं। जिला अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि शहर में डॉग बाइट की घटनाएं चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी हैं। बीते दो वर्षों में 4 हजार 800 से अधिक लोग कुत्तों के काटने का शिकार हुए हैं। बीते मार्च माह में भी 300 सौ से अधिक घटनाएं सामने आने की जानकारी सामने आई है।इस हिसाब से रोजाना औसतन 10 से अधिक लोग डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं।
गौरतलब हो कि किरोड़ीमल शासकीय जिला अस्पताल से मिले आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024 में कुल 2408 डॉग बाइट के मामले दर्ज किए गए। इनमें 1524 मामले आवारा कुत्तों के काटने के थे, जबकि 884 मामले पालतू कुत्तों से जुड़े थे। वर्ष के अंत में दिसंबर माह में सबसे ज्यादा 310 मामले सामने आए, जो पूरे साल का सर्वाधिक आंकड़ा रहा।वहीं वर्ष 2025 में नवंबर तक 2396 डॉग बाइट के मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें 1413 मामले आवारा कुत्तों के काटने के हैं, जबकि 983 मामले पालतू कुत्तों से जुड़े हैं। नवंबर 2025 में 245 मामले सामने आए, जो इस वर्ष के प्रमुख आंकड़ों में शामिल हैं।यदि बीते वर्ष के आंकड़ों पर गौर करे तो जनवरी में 272, फरवरी में 227, मार्च में 267, अप्रैल में 190, मई में 209, जून में 207, जुलाई में 242, अगस्त में 168, सितंबर में 165, अक्टूबर में 204 और नवंबर में 245 डॉग बाइट के मामले दर्ज किए गए। आंकड़े यह संकेत देते हैं कि शहर में कुत्तों के काटने की समस्या लगातार बनी हुई है।
निगम के इंतजाम नाकाफी
नगर निगम द्वारा शहर में आवारा कुत्तों की धरपकड़ कर उनका बधियाकरण कराने का अभियान चलाया जा रहा है। निगम का दावा है कि इस अभियान के जरिए कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है।जिसके तहत 5 सौ से अधिक आवारा कुत्तों की बधियाकरण कराए जाने की बात बताई जा रही है। हालांकि अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि डॉग बाइट के मामलों में कोई कमी नहीं आई है।लगातार सामने आ रहे मामलों ने निगम की बधियाकरण योजना की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बच्चों और बुजुर्गों को अधिक खतरा
शहर में बढ़ते आवारा कुत्तों के कारण सबसे ज्यादा खतरा बच्चों और बुजुर्गों को झेलना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि कई मोहल्लों और कॉलोनियों में कुत्तों के झुंड खुलेआम घूमते नजर आते हैं। सुबह-शाम के समय जब बच्चे स्कूल जाने या खेलने के लिए निकलते हैं और बुजुर्ग टहलने जाते हैं, तब उनके सामने अचानक कुत्तों के झुंड आ जाने से डर और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। कई मामलों में कुत्तों द्वारा दौड़ाने या काटने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं, जिससे अभिभावकों और स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ गई है।
वर्शन/ जिला चिकित्सालय में एंटी रेबीज न होने की स्थिति में मरीज को बाहर से दवा मंगाकर उपबंध कराई जाती है। बहरहाल चिकित्सकीय में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।शहर में डॉग बाइट के आंकड़े चिंताजनक है।हर माह लगभग 300 मामले सामने आ रहे है।
डॉक्टर दिनेश पटेल
सिविल सर्जन
जिला चिकित्सालय




