Monday, February 23, 2026
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हाईकोर्ट के आदेश पर लगा हाउसिंग बोर्ड के निर्माण कार्य पर रोक

हाईकोर्ट के आदेश पर लगा हाउसिंग बोर्ड के निर्माण कार्य पर रोक, वार्ड नं 22 की कॉलोनी में गार्डन निर्माण को लेकर विवाद

रायगढ़/ स्थानीय स्तर पर सुलझाने वाले एक मामले को हाउसिंग बोर्ड की हठधर्मिता के कारण मोहल्लेवासियों को हाई कोर्ट तक ले जाना पड़ा।जहां आखिरकार उच्च न्यायालय द्वारा हाउसिंग बोर्ड द्वारा नियम की अनदेखी कर किए जा रहे निर्माण कार्य पर अंतरिम आदेश तक रोक लगा दिया गया है।मामला चक्रधर नगर क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 22 का है।जहां स्थित पी के तामस्कर कालोनी में गृह निर्माण मंडल द्वारा गार्डन और स्टेज निर्माण का कार्य कराया जाना था।जिसके लिए कालोनी में मौजूद छोटी सी जगह में बाउंड्री वाल निर्माण के कार्य की शुरुआत की गई थी।परन्तु स्थल अभाव को देखते हुए मोहल्लेवासियों द्वारा इस निर्माण का विरोध भी किया गया।बावजूद इसके गृह निर्माण विभाग द्वारा कार्य जारी रखा गया।जिसे लेकर अंततः मोहल्लेवासियों को उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।वही हाईकोर्ट के आदेश के बाद निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई है।

सड़क की निर्धारित चौड़ाई प्रभावित

गौरतलब हो कि शहर के वार्ड क्रमांक-22 स्थित पी.के. तामस्कर कॉलोनी में प्रस्तावित गार्डन निर्माण को लेकर विवाद अब न्यायालय तक पहुंच गया है। मामले में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर ने संबंधित निर्माण कार्य पर आगामी आदेश तक रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार, कॉलोनी निवासी लीलाम्बर प्रसाद कश्यप द्वारा दायर रिट याचिका में राज्य शासन, छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड, कलेक्टर रायगढ़, नगर निगम आयुक्त एवं कार्यपालन अभियंता को पक्षकार बनाया गया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कॉलोनी के बीच स्थित खाली भूमि पर गार्डन निर्माण के नाम पर बाउंड्रीवाल खड़ी की जा रही है, जिससे सड़क की चौड़ाई प्रभावित हो रही है।आवेदक का कहना है कि स्वीकृत लेआउट के अनुसार सड़क की चौड़ाई 25 फीट निर्धारित है, लेकिन वर्तमान निर्माण के चलते सड़क संकरी हो रही है, जिससे आवागमन में बाधा उत्पन्न हो रही है। साथ ही आपातकालीन स्थिति में फायर ब्रिगेड जैसे वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है। कॉलोनी के बीच स्थित पेड़ एवं विद्युत खंभे भी सड़क के बीच में आ रहे हैं, जिससे समस्या और बढ़ रही है।

स्थानीय स्तर पर की थी शिकायत

मामले को लेकर पूर्व में स्थानीय स्तर पर भी शिकायत की गई थी, जिसमें संबंधित अधिकारियों से निर्माण स्थल का निरीक्षण कर स्वीकृत लेआउट के अनुसार ही कार्य कराने की मांग की गई थी। साथ ही सड़क के बीच स्थित पेड़ और बिजली खंभों को हटाकर व्यवस्थित करने की मांग भी रखी गई थी।उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान न्यायालय ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए 17 फरवरी 2026 को निर्माण कार्य पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश पारित किया है। साथ ही संबंधित पक्षों को निर्देशित किया गया है कि आगामी आदेश तक किसी भी प्रकार का निर्माण कार्य न किया जाए।फिलहाल न्यायालय के आदेश के बाद निर्माण कार्य पर रोक लग गई है और अब अगली सुनवाई में मामले की स्थिति स्पष्ट होगी। वहीं कॉलोनीवासियों में इस फैसले को लेकर राहत की सांस ली है।

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