तीन वर्षों में चोरी के 1300 प्रकरण, 776 की हुई गिरफ्तारी, 6 करोड़ 84 लाख 39 हजार की संपत्ति हुई थी चोरी,2 करोड़ 69 लाख की जप्ती शेष
रायगढ़/ जिले के औद्योगिकीकरण के साथ ही जितना विस्तार हुआ है।उतनी ही आबादी बढ़ने के साथ चोरी की घटनाओं में भी जमकर इजाफा देखने को मिला है।
बीते तीन वर्षों के अंतराल में चोरी के मामले में जितनी बढ़ोत्तरी हुई है।उतने ही इन मामलों को सुलझाने पुलिस द्वारा सक्रियता दिखाई गई।मिली जानकारी के मुताबिक बीते 3 वर्षों में दर्ज चोरी के लगभग 1300 प्रकरणों में 776 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है।इनमें सर्वाधिक मामले कोतवाली में दर्ज किए गए।आंकड़ों की माने तो जिले में चोरी के हर वर्ष लगभग 433 प्रकरण सामने आ रहे है।इन मामलों में तकरीबन 65 फीसदी मामलों का खात्मा किया जा चुका है।
52 फीसदी मामले खात्मे में
गौरतलब हो कि बीते कुछ सालों में जिले में चोरी की वारदातें बढ़ी हैं, लेकिन पुलिसिया दिलचस्पी छोटी चोरियों की बजाय बड़ी चोरियों को सुलझाने में ज्यादा नजर आती है। शहरी क्षेत्र की बात करे तो देर रात में घूमने वाले असामाजिक तत्वों द्वारा दी जाने वाली चोरी की वारदाते पहेली बनकर रह जाती है।इसका कारण इनके द्वारा ऐसे घर या दुकान को टारगेट किया जाना, जहां चोरी की वारदात को अंजाम देने के बाद भी वे आसानी से पुलिस की गिरफ्त से बचा जा सके। मुख्य रूप से जहां सीसीटीवी कैमरे का पहरा ना हो, ऐसी जगहों को उनके द्वारा निशाना बनाया जाता है। इसके अलावा शहर के मुख्य मार्ग पर स्थित दुकान या मकान के बजाए गली मोहल्लों के भीतर स्थित सूने मकानों में चोरी के मामले देखने को मिलते है। चोरी की वारदातों के आंकड़ों पर नजर डाले तो पता चलता है कि हर दिन एक मकान या दुकान का ताला टूट रहा है। वर्ष 2025 में साढ़े 300 से अधिक चोरी के मामले पंजीबद्ध किए गए, जिसमें से 191 मामलों का खात्मा कर दिया गया। यानी वर्ष 2025 में ही करीब 52 फीसदी मामले खात्मे में चले गए, इन मामलों के न तो आरोपी पकड़ाए और ना ही चोरी गया सामान वापस प्रार्थी को मिल पाया। चोरी की वारदातों में संलिप्त 278 आरोपियों को वर्ष 2025 में पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आंकड़ों पर नजर डाले तो वर्ष 2023 में चोरी के 498 में से 355 मामले, वर्ष 2024 में 423 में से 278 और वर्ष 2025 में 364 में से 191 मामलों का खात्मा हो गया।
पेट्रोलिंग का दायरा सीमित
सवाल है पुलिस की रात्रि गश्त का जिनकी चल चौबंद व्यवस्था की दावों के बावजूद भी चोरी की घटनाएं घटित हो जाती है। या फिर कहे कि पुलिसिया सतर्कता में कमी की वजह से अज्ञात चोरों को घटना को अंजाम देने मौका मिल जाता है।बताना लाजमी होगा कि पुलिस की रात्रि गस्त में तैनात जवान मुख्य मार्ग से ही निकल जाते हैं, लेकिन इनका ध्यान मोहल्लों की तंग गलियों में नहीं होता है। सूत्र बताते हैं कि पुलिस की पेट्रोलिंग वाहन कई मोहल्ले में तो जाती ही नहीं है। यही वजह है कि असामाजिक तत्व इन गलियों में स्थित मकानों में चोरी की वारदात को अंजाम देते हैं। ऐसे में पुलिस की गस्त भी नाकाफी और बेअसर साबित होती है।बीते तीन सालों में जिले में 6 करोड़ 84 लाख 69 हजार 147 रूपए की संपति चोरी हुई थी, जिसमें से अब भी 2 करोड़ 69 लाख 44 हजार 35 रूपए की चोरी गई संपति की जब्ती करना शेष है। वहीं अब तक 4 करोड़ 15 लाख 25 हजार 112 रूपए की संपति जब्त कर ली गई है।




