Saturday, February 7, 2026
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रोशन भैया : मेरे प्रेरणा मार्गदर्शक का पुण्य स्मरण – कमल शर्मा

रोशन भैया : मेरे प्रेरणा मार्गदर्शक का पुण्य स्मरण- कमल शर्मा —————
दोनों के बीच संबंध इतना प्रगाढ़ हो गया कि एक प्रेस फोटोग्राफर से ज्यादा पारिवारिक मेरी नजर में तो उनकी साफगोई ही उनकी व्यक्तिगत पहचान बन गई, जो अंत तक उनके साथ रही। उनकी इसी विशेषता ने उन्हें राजनीति व सामाजिक क्षेत्रों में अन्यों से अलग रखा। हालांकि, कुछ लोग उनकी साफगोई को अन्यथा ले लेते थे, लेकिन जो लोग उनके साथ दिल से जुड़े होते थे, वे अच्छी तरह जानते थे कि रोशन भैया उनके शुभचिंतक की हैसियत से ही ये सब कह रहे हैं। यदि अन्यों की तरह वे आश्वासन देते कि तुम्हारा काम हो जाएगा और नियम-कानून के चक्कर में काम नहीं हुआ या विलंब हुआ, तब उत्पन्न होने वाली स्थिति बड़ी विकट होती और शायद इस स्थिति से आप उबर न पाएं। इसीलिए मैं कहता हूं कि उनकी साफगोई ही उनकी विशेष पहचान थी। उनका दिल स्वच्छ जल की तरह निर्मल था।


गंभीर व विवादित मुद्दों को हल करने में महारत
सामाजिक क्षेत्र में किसी भी गंभीर व विवादित मुद्दों को हर करने में तो उनका कोई मुकाबला ही नहीं। चाहे वह चांदनी चौक मैदान में आयोजन को लेकर हिंदू-मुस्लिमों के बीच विवाद हो, चाहे अग्रसेन संघ का चुनाव। इसी तरह के कई ऐसे मसले सामने आए, जिसे उन्होंने पूरी गंभीरता व ईमानदारी से सुलझा लिए। किसी भी पक्ष को उन्होंने नाराज नहीं किया। सबको संतुष्ट करते हुए गंभीर से गंभीर विषयों का हल निकाला।
उनका गले में हाथ डालकर बतियाना
मेरे 28 साल के संबंध में कई बार ऐसे मौके भी आए, जब मेरी उनसे सहमति नहीं बनी। नाराज भी हुआ, लेकिन जब मुलाकात हुई, तो रोशन भैया का वही अंदाज। गले में हाथ डाले और किनारे ले जाकर डांटने के अंदाज में- ‘क्यों रे कमल.. तू कल क्यों नहीं मिला। बिलकुल अधिकारपूर्वक- मेरी फोटो कहां है? जल्दी दे.. और बस मैं उनका कायल हो जाता। कैमरे व मोबाइल उनके सामने खोलकर रख देता और पूछ बैठता- देखिए.. कौन सी फोटो चाहिए। ये थोड़ी हिल गई है, ये दूर से है.. हां.. ये ठीक है…। अब जब वे नहीं हैं, तो मेरी स्मृति पटल में जैसे एक चित्रपट की तरह सब तैर रही है..।
ऐसा ऊर्जावान व तंदुरुस्त की…
रोशन भैया की तंदुरुस्ती व ऊर्जा का तो क्या कहने? नौजवान भी उनके आगे शरमा जाए। इसका सबसे बड़ा राज उनकी दिनचर्या। तड़के 4 बजे उठ जाना, नियमित योग के बाद टहलने निकल जाना। पुराने दोस्तों के साथ युवाओं से बतियाना। सच कहूं तो कमला नेहरू उद्यान में तो मैं खुद उनसे ऊर्जा लेने के बहाने ही पहुंचता था। चुनाव के दौरान यदि उनके साथ चलना होता, तो पहले से ही तैयारी करनी पड़ती थी। मैंने तो उनके साथ जिया है। बहुत कुछ सीखा हूं। रील के साथ भी और रियल के साथ भी। उनके नहीं रहने पर भी उनसे सीखूंगा। सबकुछ मेरी स्मृति पटल पर है, पर रोशन भैया आप…।
अब कितना लिखूं.. उनके साथ 28-30 साल के सफर को लिखना भी चाहूं तो पन्ने कम पड़ जाएंगे। आप सबसे अलग थे रोशन भैया.. आप डांटते भी थे, तो ऐसा लगता कि जैसे दुलार रहे हों। और आपका दुलारना तो….। नहीं रोशन भैया.. आप कहीं नहीं गए हैं.. आप यहीं हैं.. मेरे साथ.. मेरे कैमरे में… मेरे दिल में.. नहीं सबके साथ.. सबके दिलों में…।
आपका
कमल शर्मा

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