पुसौर अंचल अंधेरे में डूबा, रोजाना 6 घंटे बिजली गुल से जनजीवन बेहाल
मेंटेनेंस पर सालाना लाखों खर्च, फिर भी सुविधाएं का बुरा बदहाल
रायगढ़/ जिले का पुसौर अंचल इन दिनों बिजली विभाग की लचर व्यवस्था का खामियाजा भुगत रहा है। क्षेत्र में लगातार हो रही बिजली की आंख-मिचौली ने आम जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित है। हालात ऐसे हैं कि शाम करीब 5 बजे से लेकर देर रात 11 बजे लगभग 6 घंटे बिजली गुल रहती है, जिससे ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।पुसौर ब्लॉक के ग्राम गौतमा, सरायपाली, उमरिया, टीनमिनी, ठाकुरपाली सहित आधा दर्जन से अधिक गांवों के ग्रामीण इस समस्या से जूझ रहे हैं। अघोषित बिजली कटौती के चलते जहां घरेलू कार्य प्रभावित हो रहे हैं, वहीं विद्यार्थियों की पढ़ाई, के साथ खेती किसानी के कार्य भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे है।
पंप लाईन बंद करने का दे रहे हवाला
गौरतलब हो कि विद्युत विभाग के जिम्मेदार अधिकारी पुसौर अंचल में चल रही अघोषित बिजली कटौती को पंप लाईन बंद करने का हवाला दिया जा रहा है।जहां किसानों को सिंचाई सुविधा के लिए उपलब्ध कराए गए पंप कनेक्शन को शासन के निर्देशानुसार 18 घंटे ही विद्युत आपूर्ति दिए जाने की बात कही जा रही है।परन्तु पंप कनेक्शन के साथ ही घरेलू लाईनो में भी कटौती किए जाने की बात सामने आ रही है।जिसे विभागीय जिम्मेदार सिरे से नकार रहे है।परन्तु जहां कुछ समय पूर्व तक आमजन दोहरी बिजली बिल के मार से बमुश्किल उभर सका वही अब अघोषित कटौती की मार भी झेलने को मजबूर है।
लाखों का मेंटेनेंस बेकार
विदित हो कि बिजली विभाग हर वर्ष मेंटेनेंस के नाम पर लाखों रुपये खर्च तो जरूर करता है।परन्तु ग्रामीण अंचलों में इसकी जमीनी हकीकत विपरीत नजर आती है। जाने का दावा करता है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर है। हल्की आंधी या बारिश होते ही बिजली गुल हो जाना आम बात हो गई है।सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि बार-बार शिकायत के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा। बिजली आपूर्ति बहाल होने में घंटों लग जाते हैं और विभागीय अमला भी संतोषजनक जवाब देने से बचता नजर आता है। जब मेंटेनेंस पर हर साल लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो फिर बुनियादी सुविधा बिजली के लिए उन्हें घंटों क्यों जूझना पड़ता है।
वर्शन/ शासन के निर्देशानुसार पंप कनेक्शन में 12 घंटे ही विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराई जानी है।यह प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है।
शैलेन्द्र दुबे, जे ई विद्युत विभाग पुसौर




