स्वच्छता सर्वेक्षण पर बट्टा लगाता वार्ड कर्मण 42 का अधूरा ओ डी एफ
35 परिवार योजना से वंचित, वर्षों बाद भी नहीं हुआ शौचालय निर्माण पूरा
रायगढ़/—एक ओर नगर निगम प्रशासन स्वच्छता सर्वेक्षण को लेकर शहर के प्रमुख मार्गों, चौक-चौराहों और सार्वजनिक स्थलों के सौंदर्यीकरण में जुटा हुआ है, तो दूसरी ओर जमीनी हकीकत यह है कि वार्ड क्रमांक 42 अमलीभौना में आज भी बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। यहां के रहवासी शौचालय निर्माण के लिए वर्षों से जद्दोजहद कर रहे हैं, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन और रायगढ़ को ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) बनाए रखने के दावों पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।जिसे लेकर एक बार फिर वार्डवासियों द्वारा कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंप शौचालय निर्माण की मांग रखी गई है।
लगभग 3 दर्जन घर योजना से वंचित
गौरतलब हो कि कुछ वर्षों पूर्व जहां समूचे जिले को ओ डी एफ बनाने युद्धस्तर पर प्रयास किया गया था।जिसमें आशातीत सफलता भी मिली।परन्तु जिले में जहां कुछ ग्राम पंचायत इस योजना में शतप्रतिशत ओडी एफ बनाना शेष रह गए तो वही शहर क्षेत्र में भी एक बार फिर वार्ड क्रमांक 42 में ऐसी स्थिति देखने को मिल रही है।जहां अब तलक वार्ड के 35 घरों में शौचालय का निर्माण नहीं कराया जा सका है।वही निम्न वर्ग परिवार तबका होने को वजह से इनकी आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं है कि वे स्वयं के खर्चे पर इसका निर्माण करा सके।मजबूरी में इन परिवारों के पुरुषों और महिलाओं को खुले में शौच के लिए जाना पड़ता है। खासतौर पर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को इससे गंभीर असुविधा और असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है।हालांकि अपनी इस समस्या से आवेदकों द्वारा निगम एवं जिला प्रशासन को कई मर्तबे अवगत कराया गया।बावजूद इसके आज पर्यंत इस समय का निवारण नहीं हो सका है।
कैसे होगा स्वच्छ मिशन पूरा
विदित हो कि शासन की ओडीएफ योजना और स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को व्यक्तिगत शौचालय निर्माण हेतु अनुदान का प्रावधान है। बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर योजना का लाभ इन जरूरतमंद परिवारों तक नहीं पहुंच पा रहा है।कुछ वर्षों पूर्व भी इसके निर्माण को लेकर शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में अनियमितता उजागर हुई थी।बावजूद इसके कोई कठोर कार्यवाही न होने की स्थिति में गड़बड़ी में कोई सुधार नहीं हो सका है।
लोगों की माने तो स्वच्छता सर्वेक्षण के समय केवल दिखावटी सफाई और रंग-रोगन से शहर को ओडीएफ नहीं कहा जा सकता। जब तक हर घर में शौचालय और उसका नियमित उपयोग सुनिश्चित नहीं होगा, तब तक स्वच्छ भारत मिशन का उद्देश्य अधूरा ही रहेगा।अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और नगर निगम इस आवेदन पर कितनी गंभीरता दिखाते हैं और वार्ड क्रमांक 42 के जरूरतमंद परिवारों को कब तक शौचालय निर्माण की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है।




