Tuesday, March 3, 2026
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सलीम और जयंत के वार्ड में कुम्हलाए कमल को खिलाने बीजेपी की रणनीति पर सबकी नजर

सलीम और जयंत के वार्ड में कुम्हलाए कमल को खिलाने बीजेपी की रणनीति पर सबकी नजर

दोनों नेता निकाय चुनाव में 6- 6 बार जीतकर पहुंचे है निगम की राजनीतिक गलियारों में

35 साल के वनवास को पार पाने संगठन और पार्टी करेगी रणभेदी घेरा

रायगढ़ शहर के अंदर 1994 से कांग्रेस के दो दिग्गज नेताओं ने बीजेपी के सभी रणनीति राजनीति को ध्वस्त कर अपना जादू वर्चस्व के तौर मतदताओं के बीच बनाये हुए है। मानो जयंत और सलीम अजेय योद्धा के तौर पर जाने पहचाने जाने लगे है। पार्टी में भी उनके कद का कोई शानी नही है। आलम यह है जयंत और सलीम के अभेद किले को भाजपा इस बार 2025 के निकाय चुनाव में भेदने और कुम्हलाए कमल को खिलाने क्या दांव पेंच के अलावा उम्मीदवार चयन इस पर सबकी नजर बनी हुई है।

वर्ष 2018 के विधानसभा मे जिले में कांग्रेस ने ऐतिहासिक जीत हासिल करते हुए 5 विधानसभा में पंजा का परमच लहराने में बड़ी सफलता हासिल की है। वही यह जीत भाजपा के 15 वर्षीय कार्यकाल को ध्वस्त कर दिया है। इस चुनाव का असर निकाय चुनाव 2019 में भी नजर आया था। कांग्रेस के पार्षद बड़ी संख्या में जीतकर निगम की राजनीति में पदार्पण किए थे। सधी हुई राजनीति और पार्टी की दिशा निर्देशों के अनुसरण पर अप्रत्यक्ष तौर महापौर बनने में सफलता हासिल की थी। इस चुनाव में जयंत और सलीम ने जीत का छक्का भी लगाया था। चुनाव में भाजपा भी पूरी तैयारी के साथ मैदान में थी लेकिन दोनों के अभेद किलो को भेदने में सफलता हासिल नहीं कर पाई, और दोनों ही वार्डों में उन्हें निराशा हाथ लगी।
वर्तमान में भाजपा की सहायक सरकार प्रदेश पर काबिज है और रायगढ़ विधानसभा भी भाजपा के कब्जे में है यहां से रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी को वित्त मंत्री के रूप मे दायित्व दी गई है। ऐसे में इस बार के चुनाव में भाजपा की ओर से दोनों के गढ़ को ढहाने के लिए फिर से मजबूत दावेदार चुनावी मैदान में लाकर चुनाव जीतने के लिए लालायित रहेगी और कुम्हलाए कमल को खिलाने जोर लगाएगी। चूंकि यहां दोनो वार्डो में भाजपा की राजनीति- रणनीति और उम्मीदवार पर सबकी नजर बनी हुई है।

ऐसे रहा जयंत और सलीम का मोहल्ले की गलियों से निगम तक का सफरनामा

जयंत ठेठवार

1994 नगर पालिका में निर्दलीय पार्षद।
1999 नगर पालिका में कांग्रेस से पार्षद
2004 निर्दलीय पार्षद
2009 कांग्रेस पार्षद एवं नेता प्रतिपक्ष बने।
2013 में उनकी धर्मपत्नी कांग्रेस से पार्षद स्वयं जिला कांग्रेस अध्यक्ष रहे ।
2019 में पुनः कांग्रेस से पार्षद वर्तमान में सभापति नगर निगम बने।

सलीम नियारिया

1994 में पंतग छाप से निर्दलीय कांग्रेस के समर्थित उम्मीदवार को हराए
1999 में कांग्रेस की टिकट पर जीत हासिल किए।
2004 में टिकट कटने के बाद निर्दलीय में जीत हासिल किए है।
2009 में कांग्रेस से जीत हासिल किए
2014 में कांग्रेस से जीतकर सभापति बने
2019 में फिर से कांग्रेस से जीतकर निगम में आए और एमआईसी सदस्य बने।

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