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फोरलेन की मंजूरी के बाद भी बदहाल सड़क से जूझ रहे राहगीर, धूल और जाम से बढ़ी परेशानी

फोरलेन की मंजूरी के बाद भी बदहाल सड़क से जूझ रहे राहगीर, धूल और जाम से बढ़ी परेशानी

कोतरारोड बाईपास से ढिमरापुर मार्ग पर भारी वाहनों का दबाव, गड्ढों और उड़ती धूल से दुर्घटना का खतरा; निर्माण शुरू होने तक राहत देने वैकल्पिक व्यवस्था की दरकार

रायगढ़/शहर के कोतरारोड बाईपास से ढिमरापुर चौक तक का मार्ग इन दिनों आम राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। एक ओर इस सड़क के चौड़ीकरण और फोरलेन निर्माण को प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति मिल चुकी है, वहीं दूसरी ओर मौजूदा सड़क की बदहाली, गड्ढों, उड़ती धूल और भारी वाहनों के दबाव से लोगों को रोजाना जूझना पड़ रहा है। मार्ग पर यातायात का बढ़ता दबाव और जाम की स्थिति लोगों की परेशानी को और बढ़ा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब तक फोरलेन निर्माण का काम पूरा नहीं हो जाता, तब तक आम नागरिकों को राहत देने के लिए जिम्मेदार विभागों द्वारा कोई वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की जा रही है?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ढिमरापुर चौक से कोतरा थाना चौक तक लगभग 4.125 किलोमीटर सड़क के चौड़ीकरण एवं फोरलेन निर्माण के लिए प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति दी जा चुकी है। वहीं, ढिमरापुर से उर्दना सीएमओ तिराहा तक सड़क निर्माण कार्य के लिए लगभग 44 करोड़ रुपये की तकनीकी स्वीकृति मिलने की जानकारी भी सामने आई है। यह परियोजना शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।इस मार्ग से प्रतिदिन गुजरने वाले दोपहिया वाहन चालकों, पैदल राहगीरों, छोटे वाहन चालकों और स्थानीय नागरिकों को विशेष रूप से परेशानी का सामना करना पड़ता है। भारी वाहनों के बीच से निकलना जहां जोखिम भरा हो सकता है, वहीं जर्जर सड़क पर गड्ढों से बचते हुए वाहन चलाना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।सड़क की खराब स्थिति के कारण वाहनों के गुजरने पर धूल के गुबार उठते हैं। इससे आसपास के रहवासियों, दुकानदारों, पैदल चलने वालों और दोपहिया वाहन चालकों को परेशानी होती है। लगातार उड़ती धूल से वायु प्रदूषण बढ़ने की आशंका रहती है। वहीं, धूल के कारण दृश्यता प्रभावित होने पर सड़क दुर्घटनाओं का जोखिम भी बढ़ सकता है। ऐसे में सड़क निर्माण की दीर्घकालीन योजना के साथ-साथ वर्तमान परिस्थितियों में सुरक्षा सुनिश्चित करना भी प्रशासन और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।सड़क के फोरलेन में तब्दील होने तक क्या आम नागरिकों को बुनियादी राहत उपलब्ध नहीं कराई जा सकती? यह सवाल अब महत्वपूर्ण हो गया है। यदि निर्माण कार्य में समय लगना है, तो इस अवधि में धूल नियंत्रण के लिए नियमित पानी का छिड़काव, गड्ढों की अस्थायी भराई, सड़क के खतरनाक हिस्सों की मरम्मत, चेतावनी संकेतक लगाने और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने जैसे उपाय किए जा सकते हैं।

भारी वाहनों की आवाजाही से बढ़ रहा दबाव

कोतरारोड बाईपास से ढिमरापुर तक के मार्ग पर औद्योगिक गतिविधियों और परिवहन से जुड़े भारी वाहनों की आवाजाही का दबाव बना रहता है। जिंदल स्टील एंड पावर प्लांट तथा ट्रांसपोर्ट यार्ड से संबंधित वाहनों की आवाजाही के बीच सड़क की मौजूदा स्थिति यातायात संचालन को चुनौतीपूर्ण बना रही है। इसके साथ ही भारी वाहनों की आवाजाही वाले समय और स्थानों पर यातायात प्रबंधन को प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।

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