20.52 करोड़ की स्वीकृति, 12 माह में बनना है पुल; क्या तय समय पर पूरा होगा निर्माण?
मरम्मत से शुरू हुई आवाजाही, लेकिन स्थायी समाधान का इंतजार
रायगढ़–गोवर्धनपुर–रामपुर मार्ग पर केलो नदी में उच्चस्तरीय पुल निर्माण जारी, जर्जर पुल के कारण परेशान ट्रांसपोर्टरों को मरम्मत से मिली राहत; पांच साल पुराने अधूरे पुलों ने बढ़ाई चिंता
रायगढ़/ गोवर्धनपुर–रामपुर मार्ग पर केलो नदी में उच्चस्तरीय पुल निर्माण की परियोजना से आवागमन की समस्या के स्थायी समाधान की उम्मीद जगी है। लंबे समय से जर्जर पुल और सड़क के कारण परेशान ट्रांसपोर्टरों को निजी कंपनी द्वारा पुराने पुल की मरम्मत कर भारी वाहनों की आवाजाही शुरू करवाए जाने से फिलहाल राहत मिली है। पहले पुल की खराब स्थिति के चलते वाहनों को वैकल्पिक मार्ग से अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे ईंधन, समय और परिवहन लागत बढ़ रही थी। मरम्मत के बाद आवाजाही शुरू होने से वाहन मालिकों को हो रहे नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, यह व्यवस्था महज एक वैकल्पिक राहत है। स्थायी समाधान नए उच्चस्तरीय पुल का निर्माण पूरा होने के बाद ही मिल सकेगा।
लोक निर्माण सेतु विभाग के अनुसार, केलो नदी पर उच्चस्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग निर्माण के लिए 20.52 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। स्वीकृति की तारीख 14 अगस्त 2025 दर्ज है। वहीं, कार्य की अनुबंध राशि 1145.00 लाख रुपये यानी 11.45 करोड़ रुपये अंकित है। कार्यादेश की तारीख 11 जून 2026 है, जबकि कार्य पूरा करने की निर्धारित अवधि 12 माह यानी एक वर्ष बताई गई है।इन तिथियों के अनुसार, कार्यादेश जारी होने के बाद निर्धारित अवधि की गणना करें तो निर्माण कार्य की लक्ष्य अवधि जून 2027 के आसपास पूरी होती है। हालांकि, वास्तविक पूर्णता तिथि की पुष्टि विभागीय अनुबंध और कार्यादेश के आधार पर की जानी चाहिए। प्रस्तावित पुल की लंबाई 122.80 मीटर है। इसमें पांच स्पान दर्शाए गए हैं, जिनमें प्रत्येक की लंबाई 24.56 मीटर है। पुल के साथ पहुंच मार्ग का निर्माण भी परियोजना का हिस्सा है। गोवर्धनपुर की ओर पहुंच मार्ग की लंबाई 408 मीटर और रामपुर की ओर 460 मीटर दर्ज है। इस प्रकार दोनों ओर के पहुंच मार्ग की कुल लंबाई 868 मीटर होती है। यानी परियोजना केवल नदी पर पुल बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों ओर सड़क संपर्क को विकसित करना भी इसके दायरे में शामिल है।अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि लगभग 20.52 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति वाली परियोजना निर्धारित अवधि में पूरी हो पाती है या नहीं। पांच साल पुराने अधूरे पुलों का उदाहरण सामने होने के कारण विभागीय निगरानी और निर्माण एजेंसी की जवाबदेही और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। वाहन मालिकों को बार-बार अतिरिक्त दूरी तय करने और बढ़ती परिवहन लागत का सामना न करना पड़े, इसके लिए जरूरी है कि निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए और पुल को समयसीमा के भीतर पूरा करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
मरम्मत से शुरू हुई आवाजाही, लेकिन स्थायी समाधान का इंतजार
पूर्व में जर्जर पुल के कारण भारी वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने से ट्रांसपोर्टरों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती थी। इससे माल परिवहन में अधिक समय लगने के साथ डीजल खर्च और वाहनों के परिचालन खर्च में भी बढ़ोतरी होती थी। परिवहन कारोबार से जुड़े वाहन मालिकों के लिए यह स्थिति आर्थिक नुकसान का कारण बन रही थी।निजी कंपनी द्वारा पुल की मरम्मत करवाकर भारी वाहनों की आवाजाही शुरू कराना फिलहाल राहत भरा कदम है। इससे वैकल्पिक मार्ग से गुजरने की मजबूरी कम हुई है और परिवहन लागत पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ घटने की उम्मीद है। लेकिन मरम्मत के आधार पर शुरू हुई आवाजाही को नए पुल के निर्माण का विकल्प नहीं माना जा सकता। भारी वाहनों के लगातार दबाव को देखते हुए पुराने पुल की सुरक्षा और उसकी उपयोगिता के संबंध में तकनीकी स्थिति स्पष्ट रहनी चाहिए।
12 माह की समयसीमा, क्या जून 2027 तक पूरा होगा काम?
निर्माण कार्य के लिए 12 माह की अवधि निर्धारित होने के कारण अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल समयसीमा का है। कार्यादेश 11 जून 2026 को जारी होने की जानकारी सूचना पटल पर दर्ज है। इस आधार पर निर्धारित अवधि जून 2027 में पूरी होने की संभावना है। ऐसे में निर्माण की प्रगति पर नियमित निगरानी जरूरी है, ताकि काम निर्धारित समय में पूरा हो सके।हालांकि, केवल समयसीमा तय होने से निर्माण पूरा होने की गारंटी नहीं मिलती। इसके लिए कार्यस्थल पर वास्तविक प्रगति, निर्माण सामग्री की उपलब्धता, श्रमिकों एवं मशीनों की तैनाती, नदी क्षेत्र में काम की स्थिति और विभागीय निगरानी जैसे पहलू महत्वपूर्ण हैं। फिलहाल उपलब्ध सूचना पटल से निर्माण की वर्तमान प्रगति या अब तक पूरे हुए कार्य का प्रतिशत स्पष्ट नहीं होता। इसलिए यह जानना आवश्यक है कि निर्माण एजेंसी ने अब तक कितना काम पूरा किया है और निर्धारित अवधि में शेष कार्य पूरा करने के लिए क्या योजना बनाई गई है।
पांच साल पुराने अधूरे पुलों से उठ रहे सवाल
रायगढ़ जिले में पांच वर्ष पूर्व स्वीकृत कई पुल निर्माण कार्यों के आज भी अधूरे पड़े होने की स्थिति के बीच इस परियोजना की समयसीमा को लेकर चिंता स्वाभाविक है। पुराने निर्माण कार्यों में देरी के कारणों और उनकी वर्तमान स्थिति की समीक्षा किए बिना नई परियोजनाओं की समयबद्धता को लेकर भरोसा कायम करना मुश्किल है।
पुल निर्माण में देरी का असर केवल आवागमन पर नहीं पड़ता। इससे परिवहन लागत, स्थानीय कारोबार, ग्रामीण संपर्क और आम लोगों की आवाजाही भी प्रभावित होती है। ऐसे में संबंधित विभाग को निर्माण कार्य की प्रगति की नियमित समीक्षा करने के साथ समयसीमा में बाधा बनने वाले कारणों को दूर करना चाहिए। यदि किसी स्तर पर काम धीमा है, तो उसके कारणों और समाधान की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
वर्सन/ गोवर्धनपुर बड़े रामपुर मार्ग में उच्चस्तरीय पुल का निर्माण किया जा रहा है। 12 माह कार्यपूर्ण करने की तिथि निर्धारित की गई है।जिसे समयसीमा पर पूरा कर लिया जाएगा।
संतोष भगत
ई ई सेतु विभाग




