HomeBlogनागरमुड़ा में अब 13 हजार पेड़ों की कटाई पूरी

नागरमुड़ा में अब 13 हजार पेड़ों की कटाई पूरी

नागरमुड़ा में अब 13 हजार पेड़ों की कटाई पूरी, ग्रामीणों के विरोध के बाद बदले हालात

पहले 1100 पेड़ों की कटाई पर हुआ था विरोध, अब सामंजस्य के बाद परियोजना क्षेत्र में तेजी से हुई कटाई

रायगढ़/ तमनार क्षेत्र के नागरमुड़ा में प्रस्तावित जिंदल कोल ब्लॉक को लेकर पेड़ों की कटाई का मामला एक बार फिर चर्चा में है। कुछ समय पहले तक जहां परियोजना क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को लेकर ग्रामीणों के विरोध के चलते स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई थी और कंपनी प्रबंधन को कटाई रोकनी पड़ी थी, वहीं अब हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों के साथ सामंजस्य बनने के बाद परियोजना क्षेत्र में कटाई का काम तेजी से आगे बढ़ा और जून-जुलाई तक करीब 13 हजार पेड़ों की कटाई पूरी किए जाने की जानकारी सामने आ रही है।

गौरतलब हो कि नागरमुड़ा में प्रस्तावित कोयला खदान के लिए पेड़ों की कटाई शुरू होने के बाद ग्रामीणों ने इसका विरोध किया था। शुरुआती चरण में करीब 1100 पेड़ों की कटाई के बाद ग्रामीणों का विरोध तेज हो गया था। ग्रामीणों ने जल, जंगल और जमीन के संरक्षण के साथ वनाधिकार, पर्यावरण और स्थानीय लोगों के हितों से जुड़े सवाल उठाए थे। विरोध बढ़ने के बाद मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों के पहुंचने से स्थिति संवेदनशील हो गई थी।शुरुआती दौर में करीब 1100 पेड़ों की कटाई के बाद ग्रामीणों के विरोध ने जोर पकड़ा। ग्रामीणों ने परियोजना क्षेत्र में आगे पेड़ों की कटाई रोकने की मांग की थी। विरोध के चलते कुछ समय के लिए कटाई का काम प्रभावित हुआ और कंपनी प्रबंधन को भी पीछे हटना पड़ा था। उस समय यह माना जा रहा था कि ग्रामीणों की आपत्तियों और वनाधिकार से जुड़े मुद्दों के निराकरण के बिना परियोजना की आगे की गतिविधियां आसान नहीं होंगी।
नागरमुड़ा में कुछ समय पहले तक करीब 1100 पेड़ों की कटाई के बाद ग्रामीणों का विरोध परियोजना के लिए बड़ी चुनौती बन गया था। इसके बाद कंपनी और ग्रामीणों के बीच बने सामंजस्य के साथ स्थिति बदली और कटाई का काम आगे बढ़ा। अब करीब 13 हजार पेड़ों की कटाई पूरी होने की जानकारी सामने आने के बाद परियोजना ने एक महत्वपूर्ण चरण पार कर लिया है।

आपसी सामंजस्य से बनी बात

इसके बाद कंपनी प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच बातचीत और सामंजस्य की स्थिति बनने के साथ परिस्थितियां बदलती गईं। कटाई का काम दोबारा आगे बढ़ा और अब सामने आई जानकारी के अनुसार जून और जुलाई माह तक करीब 13 हजार पेड़ों की कटाई पूरी हो चुकी है।
शुरुआत में जहां 1100 पेड़ों की कटाई ही ग्रामीण विरोध का बड़ा कारण बन गई थी, वहीं बाद में यह संख्या कई गुना बढ़ गई। इससे यह स्पष्ट है कि शुरुआती विरोध के बाद परियोजना क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को लेकर परिस्थितियां काफी बदली हैं।

वन और पर्यावरण पर फिर उठे सवाल

हजारों पेड़ों की कटाई पूरी होने के बाद परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर सवाल भी फिर उठने लगे हैं। कोयला खनन परियोजना से प्रभावित होने वाले वन क्षेत्र, पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय स्तर पर इसके प्रभाव को लेकर अलग-अलग तरह की चिंताएं सामने आती रही हैं।वहीं दूसरी ओर परियोजना समर्थक पक्ष की ओर से रोजगार, स्थानीय विकास और क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ने की संभावनाओं को भी प्रमुखता दी जाती रही है। ऐसे में परियोजना को लेकर विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन का मुद्दा महत्वपूर्ण बना हुआ है।


वर्शन/ नागरमुडा क्षेत्र में पहले 11 सौ पेड़ो की कटाई कर ली गई थी।जिसे विरोध के बाद बंद कर दिया गया था।ग्रामीणों से आपसी सहमति पर हुई बातचीत के बाद 13 हजार पेड़ो की कटाई पूरी कर ली गई है।
विक्रांत कुमार
रेंजर तमनार

spot_img
spot_img

JANKARM DAILY EPAPER

Recent Artical