Friday, August 21, 2026
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एमएसपी उद्योग पर फ्लाईएश का पहाड़ खड़ा करने का आरोप

एमएसपी उद्योग पर फ्लाईएश का पहाड़ खड़ा करने का आरोप, 1.60 लाख टन की अनुमति के बाद 10 लाख टन से ज्यादा राख भरने का दावा

पूर्वाचल क्षेत्र केवबलभद्रपुर में जल-जंगल-जमीन पर संकट को लेकर ग्रामीणों का मोर्चा

पर्यावरण विभाग पर शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं करने का आरोप, 26 अगस्त को धरना

रायगढ़। उद्योगों की राख अगर खेतों की मिट्टी, जंगल की हवा और गांव के जीवन पर भारी पड़ने लगे तो यह सिर्फ प्रदूषण का मामला नहीं रह जाता, बल्कि जल-जंगल-जमीन के अधिकार और पर्यावरणीय जवाबदेही का सवाल बन जाता है। रायगढ़ के ग्राम पंचायत सपनई के आश्रित ग्राम बलभद्रपुर में एमएसपी उद्योग द्वारा फ्लाईएश भराव को लेकर ऐसा ही गंभीर आरोप सामने आया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि जिस भूमि पर महज 1.60 लाख टन फ्लाईएश भरने की अनुमति दी गई थी, वहां अब अनुमति की मात्रा से कई गुना अधिक, करीब 10 लाख टन से भी ज्यादा फ्लाईएश का पहाड़ खड़ा हो चुका है।
मामले को लेकर अब ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने पर्यावरण विभाग के खिलाफ भी मोर्चा खोल दिया है। उनका आरोप है कि पहले कई बार लिखित शिकायत देने के बावजूद विभाग ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की। इसी के विरोध में 26 अगस्त को पर्यावरण विभाग के बाहर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन करने की सूचना दी गई है। मांग पूरी नहीं होने पर एमएसपी उद्योग के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है।आवेदन में बताया गया है कि इस मामले को लेकर पहले भी पर्यावरण अधिकारियों को शिकायतें दी गई थीं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार 12 मई 2026 को तथा इसके बाद दोबारा लिखित शिकायत देकर कथित फ्लाईएश भराव की जांच की मांग की गई, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ताओं ने इसी कथित निष्क्रियता को लेकर पर्यावरण विभाग की भूमिका पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि यदि अनुमति की सीमा से अधिक फ्लाईएश वास्तव में जमा हुआ है तो समय रहते जांच और कार्रवाई जरूरी थी। बहरहाल पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल आरोपों की पुष्टि का है। 1.60 लाख टन की स्वीकृत मात्रा और 10 लाख टन से अधिक फ्लाईएश जमा होने के दावे के बीच वास्तविकता क्या है, यह केवल मौके की वैज्ञानिक जांच से ही स्पष्ट होगी।

अनुमति छोटी, कथित भराव कई गुना बड़ा

शिकायत में सबसे गंभीर सवाल फ्लाईएश की मात्रा को लेकर उठाया गया है। आवेदन के मुताबिक बलभद्रपुर में संबंधित भूमि पर 1,60,000 टन फ्लाईएश भरने की अनुमति ली गई थी। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मौके पर अब जो फ्लाईएश जमा है, उसकी मात्रा करीब 10 लाख टन से भी अधिक हो सकती है।
यानी शिकायत में दावा की गई मात्रा अनुमति से कई गुना ज्यादा है। ऐसे में अब यह पता लगाना अहम होगा कि वास्तव में कितनी फ्लाईएश वहां डाली गई, अनुमति की शर्तें क्या थीं और निर्धारित सीमा से अधिक भराव हुआ है या नहीं। इसके लिए शिकायतकर्ताओं ने मौके पर जांच और वास्तविक मात्रा का आकलन कराने की मांग रखी है।

राख के पहाड़ से गांव की जमीन और हवा पर चिंता

शिकायतकर्ताओं ने फ्लाईएश के इस कथित बड़े पैमाने पर भराव को सीधे गांव के पर्यावरण से जोड़ा है। आवेदन में कहा गया है कि लगातार फ्लाईएश जमा होने से मिट्टी, हवा और वन क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। इसका असर स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य के साथ-साथ वन्यजीवों पर भी पड़ने का दावा किया गया है। ग्रामीणों की चिंता सिर्फ आज की स्थिति तक सीमित नहीं है। फ्लाईएश का लंबे समय तक जमा रहना, उसके कणों का हवा में फैलना और बारिश के दौरान उसके बहाव की स्थिति आसपास की जमीन तथा जलस्रोतों के लिए भी सवाल खड़े करती है। इसी वजह से शिकायतकर्ताओं ने मामले को केवल उद्योग बनाम ग्रामीण विवाद न मानकर व्यापक पर्यावरणीय जांच का विषय बनाने की मांग की है।

हर अतिरिक्त टन पर 1500 रुपये की मांग

शिकायत में जांच के साथ आर्थिक क्षतिपूर्ति की मांग भी की गई है। शिकायतकर्ताओं ने कहा है कि यदि जांच में अनुमति से अधिक फ्लाईएश पाया जाता है तो नियमों के अनुसार प्रत्येक अतिरिक्त टन पर 1500 रुपये पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति वसूली जाए और संबंधित पर जुर्माना लगाया जाए।
इसके अलावा जांच शिकायतकर्ताओं की मौजूदगी में कराने की मांग की गई है, ताकि फ्लाईएश की वास्तविक मात्रा और भराव की स्थिति को लेकर पारदर्शिता बनी रहे।

26 अगस्त को पर्यावरण विभाग के बाहर धरना

शिकायतकर्ताओं ने आवेदन के माध्यम से पर्यावरण विभाग को आंदोलन की सूचना भी दी है। इसके तहत 26 अगस्त को विभाग के बाहर एक दिवसीय प्रदर्शन किया जाएगा। आवेदन में कहा गया है कि प्रदर्शन के दौरान एमएसपी उद्योग के कथित फ्लाईएश भराव का मुद्दा उठाया जाएगा।
यदि इसके बाद भी कार्रवाई नहीं होती है तो शिकायतकर्ताओं ने पर्यावरण विभाग और एमएसपी उद्योग के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।

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