Monday, March 2, 2026
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पुसौर में किसानों का सड़क जाम

पुसौर में किसानों का सड़क जाम, शासन-प्रशासन के खिलाफ फूटा गुस्सा

30 प्रतिशत रकबा काटने के आदेश से नाराज किसानों ने सोसायटी के सामने किया उग्र प्रदर्शन

रायगढ़/ धान बिक्री को लेकर किसानों की समस्या समाप्त होने का नाम नहीं ले रही है।एक बार फिर पुसौर जनपद के सैकड़ों किसानों द्वारा शासन प्रशासन के खिलाफ सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया गया।किसानों ने आरोप लगाया कि समिति में उन्हें 30 प्रतिशत रकबे का धान न बेचने दबाव बनाया जा रहा है।अलबत्ता किसानों द्वारा धान खरीदी सोसायटी के सामने में ही ट्रैक्टर और चार पहिया वाहनों के माध्यम मुख्य मार्ग पर जाम लगाकर प्रदर्शन किया गया।जिसमें मुख्य मार्ग पर जाम की स्थिति निर्मित हुई।और मुख्य मार्ग में आवाजाही लगभग डेढ़ घंटे से अधिक प्रभावित रही।जहां पुसौर तहसीलदार द्वारा समिति प्रबंधक को कटे हुए सभी टोकनों के माध्यम किसानों के धान खरीदी किए जाने के निर्देश दिए जाने उपरांत ही प्रदर्शन शांत हो सका।

असमंजस में किसान

गौरतलब हो कि यह पहला मर्तबा नहीं है जब अपनी धान बिक्री को लेकर किसान शासन प्रशासन के समक्ष विरोध प्रदर्शन कर रहे है।कलेक्टर जनदर्शन के दौरान भी किसानों के टोकन न काटे जाने और रकबा समर्पण की समस्या को लेकर किसान अपना विरोध जाता चुके है।वही एक बार फिर पुसौर जनपद में 30 प्रतिशत रकबे के धान को खरीदी न किए जाने के फरमान से किसान भड़क उठे।और उन्होंने सोसायटी के समक्ष ही प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।बताना लाजमी होगा कि पुसौर अंतर्गत ऐसे कई किसान शामिल है जिनका रकबा काफी बड़ा है।जिन्हें अपनी धान बिक्री के लिए ही दो से तीन बार टोकन कटाने की दरकार पड़ती है।जो उनके लिए प्रक्रिया को और भी जटिल बनाता है।बहरहाल नायब तहसीलदार के आश्वासन उपरांत शांत हुए इस प्रदर्शन का कोई सार्थक नतीजा निकल कर सामने आएगा।क्या शान प्रशासन इसका कोई स्थाई इंतजाम कर पाएगा या फिर धान बेचने किसानों को विरोध प्रदर्शन का ही सहारा लेना पड़ता रहेगा।

घंटों लगा जाम
किसानों द्वारा पुसौर सोसायटी के समक्ष ट्रैक्टरों और चार पहिया वाहनों के साथ किए जा रहे प्रदर्शन के परिणाम स्वरूप मुख्य मार्ग पर भारी जाम की स्थिति निर्मित हो गई।मुख्य मार्ग पर ही भारी वाहनों की लंबी कतार देखने को मिली।मामले की गभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन के साथ नायब तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर किसानों के टोकन काट चुके धान को खरीदी करने सोसायटी अध्यक्ष को निर्देश दिया गया।जिसके उपरांत ही मामला शांत हो सका और प्रदर्शनकारी किसानों की वापसी हुई।

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