आस्था और श्रद्धा का केंद्र है रायगढ़ की नगर देवी बूढ़ी माई, नवरात्र में उमड़ते हैं रोजाना हजारों श्रद्धालु
रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ शहर में स्थित मां बूढ़ी माई मंदिर श्रद्धा, आस्था और धार्मिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र है। नगर देवी के रूप में पूजित मां बूढ़ी माई के प्रति शहरवासियों की अगाध आस्था है। मान्यता है कि मंदिर से लगे तालाब के समीप जामुन के पेड़ के नीचे माता रानी स्वयं प्रकट हुई थीं। माता के प्राकट्य की इस मान्यता के बाद से ही नगरवासी निरंतर उनकी पूजा-अर्चना करते आ रहे हैं। समय के साथ माता के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और गहरी होती गई और बूढ़ी माई मंदिर रायगढ़ की धार्मिक पहचान का अभिन्न हिस्सा बन गया।

1954 में हुई मंदिर ट्रस्ट की स्थापना, व्यवस्थित रूप से संचालित हो रही पूजा-अर्चना
माता बूढ़ी माई के प्रति बढ़ती श्रद्धा और मंदिर की धार्मिक महत्ता को देखते हुए वर्ष 1954 में डॉ. हरि सिंह ठाकुर के द्वारा बूढ़ी माई मंदिर ट्रस्ट की स्थापना की गई। इसके माध्यम से मंदिर की व्यवस्थाओं और धार्मिक गतिविधियों को व्यवस्थित स्वरूप प्रदान किया गया। वर्तमान में मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष राजू पांडे हैं। मंदिर के ट्रस्टी ओम पटेल, वीरेंद्र सिंह, देवेंद्र जी, अन्य श्रद्धालुओं सहित अन्य जिम्मेदार लोगों के सहयोग से मंदिर की व्यवस्थाओं का संचालन किया जा रहा है। मंदिर में नियमित पूजा-अर्चना की देखरेख पंडित रतन मिश्रा के द्वारा की जाती है। ट्रस्ट के माध्यम से धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करने के साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा का भी विशेष ध्यान रखा जाता है।
नवरात्र में भक्ति का अनूठा संगम, सुबह पांच बजे से देर रात तक दर्शन
नवरात्र के पावन अवसर पर मां बूढ़ी माई मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इन दिनों मंदिर में सुबह पांच बजे से लेकर देर रात तक हजारों श्रद्धालुओं का निरंतर आगमन होता है। माता के दर्शन के लिए पहुंचने वाले भक्त अपनी मनोकामनाएं लेकर मां के चरणों में शीश नवाते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं मंगलमय जीवन की कामना करते हैं। नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहता है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर ट्रस्ट द्वारा विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं। मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है और पूरे परिसर को भव्य स्वरूप दिया जाता है, जिससे यहां पहुंचने वाले भक्तों को धार्मिक उत्सव की दिव्यता का अनुभव होता है।

घट स्थापना के साथ शुरू होती है नौ दिनों की आराधना, मनोकामना दीप से जुड़ी भक्तों की आस्था
नवरात्र के प्रथम दिवस पर मंदिर से लगे तालाब से जल लाकर विधि-विधान के साथ घट स्थापना की जाती है। इसके साथ ही माता की नौ दिवसीय आराधना का शुभारंभ होता है। मंदिर में मनोकामना दीप प्रज्वलित करने की परंपरा भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है। भक्त अपनी श्रद्धा और मनोकामनाओं के साथ दीप प्रज्वलित करवाते हैं और मां से परिवार की खुशहाली तथा जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना करते हैं। इस वर्ष नगरवासियों द्वारा अपनी-अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना के साथ लगभग 2,000 मनोकामना दीप प्रज्वलित करवाए गए हैं। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन दीपों के दर्शन करने पहुंचते हैं। दीपों की रोशनी और माता की आराधना से मंदिर परिसर में श्रद्धा एवं भक्ति का विशेष वातावरण निर्मित होता है।
अष्टमी पर कन्या पूजन और भंडारा, महानिशा पूजा में होगी विशेष आराधना
नवरात्र के आठवें दिन यानी महाष्टमी पर मंदिर में विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। सुबह कन्या पूजन किया जाएगा। सनातन परंपरा में कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर उनकी पूजा करने का विशेष महत्व है। इसी भावना के साथ श्रद्धालु कन्या पूजन कर मां दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। इसके बाद भंडारे का आयोजन होगा, जिसमें श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे। अष्टमी की रात्रि में महानिशा पूजा संपन्न होगी। यह पूजा नवरात्र की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है, जिसमें विशेष विधि-विधान के साथ माता की आराधना की जाती है। इन आयोजनों में नगरवासियों की सहभागिता मंदिर की सामूहिक आस्था और धार्मिक एकजुटता को दर्शाती है।
नवमी को पूर्णाहुति, दशमी पर घट विसर्जन के साथ संपन्न होंगे नवरात्र के अनुष्ठान
नौ दिनों तक चलने वाली पूजा-अर्चना के क्रम में नवमी के दिन सुबह हवन एवं पूर्णाहुति का धार्मिक कार्यक्रम संपन्न होगा। इस दौरान श्रद्धालु माता के समक्ष पूजा-अर्चना कर नौ दिवसीय आराधना के पूर्ण होने पर आभार व्यक्त करेंगे और सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। इसके पश्चात दशमी के दिन विधि-विधान के साथ माता के घट का विसर्जन किया जाएगा। इसी के साथ नवरात्र के विशेष अनुष्ठानों का समापन होगा। मां बूढ़ी माई मंदिर में नवरात्र के दौरान होने वाले ये आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि रायगढ़ की सांस्कृतिक परंपरा, सामूहिक श्रद्धा और नगरवासियों की अटूट आस्था के प्रतीक हैं। माता के दरबार में उमड़ने वाली भक्तों की भीड़ यह दर्शाती है कि मां बूढ़ी माई रायगढ़वासियों के लिए केवल आराध्य देवी ही नहीं, बल्कि नगर की आस्था और विश्वास का जीवंत केंद्र भी हैं।




