Tuesday, July 21, 2026
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कहीं गाइडवाल, कहीं सीसी रोड तो कहीं नाली हुई ध्वस्त
घटिया निर्माण का पर्याय बना जनपद पंचायत लैलूंगा?

कहीं गाइडवाल, कहीं सीसी रोड तो कहीं नाली हुई ध्वस्त
घटिया निर्माण का पर्याय बना जनपद पंचायत लैलूंगा?

मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल, लाखों के निर्माण कार्य समय से पहले हुए बदहाल

लैलूंगा-छत्तीसगढ़ शासन सुशासन और भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा कर रही है, लेकिन रायगढ़ जिले के विकासखंड लैलूंगा में हो रहे निर्माण कार्य इन दावों की हकीकत पर सवाल खड़े कर रहे हैं। जनपद पंचायत लैलूंगा के अंतर्गत विभिन्न ग्राम पंचायतों में लाखों रुपये की लागत से निर्मित सीमेंट कंक्रीट सड़क, नाली एवं गाइडवाल जैसे विकास कार्य निर्माण के कुछ ही समय बाद क्षतिग्रस्त होने लगे हैं। इससे न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका व्यक्त की जा रही है, बल्कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था भी संदेह के घेरे में आ गई है।
ताजा मामला ग्राम पंचायत जामबाहर का है, जहां हाल ही में निर्मित सीमेंट नाली जगह-जगह से टूट गयी है। कई स्थानों पर नाली की दीवारें क्षतिग्रस्त हैं और कंक्रीट उखड़ चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप किया गया होता तो इतनी कम अवधि में नाली की यह स्थिति नहीं होती।
इसी प्रकार ग्राम सागरपाली में लाखों रुपये की लागत से निर्मित गाइडवाल निर्माण के एक साल के अंदर ही क्षतिग्रस्त होकर गिर चुकी है। वहीं ग्राम बेसकीमुड़ा में निर्मित सीमेंट कंक्रीट सड़क के किनारे टूटने लगे हैं और सड़क की मजबूती पर भी सवाल उठ रहे हैं। सीमेंट कंक्रीट सड़क प्राकलन के अनुसार 15 से 20 सेंटीमीटर मोटाई की एम 20 ग्रेड की निर्माण होना चाहिए। एम 20 ग्रेड सीमेंट बालू गिट्टी का अनुपात है जो कि सीमेंट 1 भाग एवं डेढ़ भाग बालू एवं गिट्टी 3 भाग का होता है। लेकिन ग्रामीणों के अनुसार यह मात्र 1 भाग सीमेंट में 5 भाग बालू एवं 8 भाग गिट्टी का मिश्रण से ढलाई कर बनाया जा रहा है। मोटाई भी इस्टीमेट से आधे बमुश्किल 7 से 10 सेंटीमीटर बनाया जा रहा है। लगातार सामने आ रहे इन मामलों से यह प्रतीत होता है कि गुणवत्ता नियंत्रण और तकनीकी निरीक्षण की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से नहीं अपनाई गयी।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग की कार्यशैली पर सवाल

ग्रामीणों का आरोप है कि जनपद पंचायत लैलूंगा में पदस्थ मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) एवं ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग (आरईएस) की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि निर्माण कार्यों का समय-समय पर प्रभावी निरीक्षण नहीं किया जा रहा, जिससे घटिया निर्माण करने वाली एजेंसियों के हौसले बढ़ रहे हैं। यदि निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग एवं गुणवत्ता परीक्षण समय पर किए जाते, तो इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न नहीं होती।कमीशन के खुला खेल से ही घटिया निर्माण को प्रश्रय मिल रहा है।

सुशासन और जीरो टॉलरेंस के दावों पर उठे प्रश्न

राज्य सरकार द्वारा भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस और सुशासन की बात लगातार कही जाती है, लेकिन लैलूंगा विकासखंड में सामने आ रहे निर्माण कार्यों की स्थिति इन दावों पर प्रश्नचिह्न लगा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि दोषपूर्ण निर्माण पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो सरकारी राशि का दुरुपयोग लगातार जारी रहेगा और विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे।

जिला प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज

ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि ग्राम जामबाहर, सागरपाली, बेसकीमुड़ा,जामबहार सहित जनपद पंचायत लैलूंगा के अंतर्गत हाल के वर्षों में हुए सभी निर्माण कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई जाए। साथ ही संबंधित विभागों की भूमिका की भी निष्पक्ष समीक्षा की जाए। यदि जांच में गुणवत्ता से समझौता, लापरवाही अथवा वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों, निर्माण एजेंसी एवं दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए तथा क्षतिग्रस्त कार्यों का पुनर्निर्माण कराया जाय।

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