प्रदेश के 4 जिले में जमीनो का नया कलेक्टर दर प्रभावी, रायगढ़वासी अब भी देख रहे है टकटकी निगाहों से, नए दर से रीयल एस्टेट कारोबार ठप, सांसोधन दर पर 20 से 30 फीसद तक का आएगा बदलाव
रायगढ़। जमीनों में कलेक्टर दर के तहत गाइडलाइन लागू लागू करने के बाद पुनः संशोधन किया गया है। इसमे प्रदेश के कई जिले में संसोधन होकर नई दर लागू हो चुकी है। जमीनों की कीमत पुर्ननियंत्रण होने के साथ-साथ खरीदी बिक्री का दौर भी चलने लगा है। इससे शासन के खजाने में राजस्व भी आने लगा है लेकिन नए दर लागू रायगढ़ जिला मुख्यालय में अब तक लागू नही होने से रजिस्ट्री का कार्य थम गया है।
गौरतलब हो कि 20 नवंबर 2025 से लागू की गई नवीन गाइडलाइन दरों के अंतर्गत आवश्यकतानुसार पुनरीक्षण की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। राज्य शासन द्वारा पूर्व में जिला मूल्यांकन समितियों को यह निर्देश जारी किए गए थे कि यदि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप गाइडलाइन दरों में संशोधन की आवश्यकता हो, तो उसके प्रस्ताव केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजे जा सकते हैं।
उधर केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड द्वारा अनुमोदित संशोधित गाइडलाइन दरें धमतरी, बलौदाबाजार और गरियाबंद जिलों में 4 फरवरी 2026 से प्रभावशील हो चुका है। आम नागरिकों, संपत्ति क्रेता-विक्रेता तथा अन्य संबंधित हितधारकों को इन नवीन दरों की जानकारी संबंधित जिला पंजीयन कार्यालयों एवं विभाग की आधिकारिक वेबसाइट में उपलब्ध हो चुका हैं।बताया जा रहा है कि रायगढ़ के लिए निर्देश प्राप्त हो चुका है । जिसमें जल्द ही नया दर वेबसाइट में उपलब्ध हो जाएगा। इसमे नई गाइडलाइन कीमतों को जारी किया जा सकता है। ऐसे में रायगढ़ में भी बढ़ी हुई कीमतों से आम जनता को राहत मिलने की उम्मीद नजर आ रही हैं। संसोधन के बाद गाइड लाइन कीमतों में 15 से 20 फीसदी तक की कटौती देखी जा सकती है।
बता दें कि छत्तीसगढ़ सरकार ने जमीनों की बढ़ी हुई गाइडलाइन रेट को लेकर राहत देते हुए रायपुर और रायगढ़ जिलों के लिए नई गाइडलाइन रेट जारी की है। 20 नवंबर 2025 को भूमि रेट में भारी वृद्धि की गई थी, जिसमें जमीनों की गाइडलाइन कीमतें 400 से 500 गुना तक बढ़ गई थी। अब सरकार ने इसे कम कर आम जनता को आर्थिक राहत प्रदान का फैसला दिया है।
नए दर से रुका कार्य, नए दर लागू होते ही आएगी तेजी
पिछले साल नए संशोधन दर से जमीन खरीदी बिक्री का कार्य थम गया, नए प्लाट, भवन बिक्री की पंजीकरण लोग करवाने से पीछे हट गए। इसके पीछे की वजह केवल जमीनों की कीमत में बेतहाशा वृद्धि होना है। इसका असर कालोनियों के प्रोजेक्ट में पड़ने लगा है। इस बीच नए गाइडलाइन जल्द ही लागू होने की सुगबुगाहट चल रही हैं।
पीछे की वजह अन्य जिलों में कलेक्टर दर का लागू होना है। देखा जाए तो नया दर लागू होते ही पुराने कार्य रजिस्ट्री तेजी से आगे बढ़ेगा इसका सीधा लाभ शासन को राजस्व कर रूप में होगा।
भूमि में निवेश से बचने लगे लोग, रीयल एस्टेट कारोबार परेशान
पिछले साल 20 नवंबर को जारी गाइडलाइन ने जमीन कारोबार को बुरी तरह से प्रभावित किया है। इसकी वजह से घर का सपना अपने तरीके से स्वतंत्र आवास बनाने के लिए खरीददार नही मिल रहा है, खरीददार कीमतें सुनने के बाद अपने सपने को सपना ही बना रहे है। इस तरह के परिस्थितियों में रियल स्टेट का कारोबार बिगड़ने सेबड़े बिल्डर का निवेश से भी कतराने लगे है दरअसल खरीददार पर ही यह कारोबार टिका है।
इन जिले में हो चुका है नई संसोधन दर लाग
प्रदेश में 20 नवंबर 2025 से नवीन गाइडलाइन दरें लागू की गई थीं। इसके बाद राज्य शासन द्वारा जिला मूल्यांकन समितियों को निर्देश दिए गए थे कि वे गाइडलाइन दरों के पुनरीक्षण से संबंधित प्रस्ताव केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड को भेजें। इसी क्रम में केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड द्वारा अनुमोदित संशोधित गाइडलाइन दरें अब धमतरी, बलौदा बाजार और गरियाबंद जिलों में लागू कर दी गई हैं। इससे पहले रायपुर तथा कोरबा में भी लागू किया जा चुका है, यह 4 फरवरी से प्रभावी हो चुका हैं।
आठ साल से लटका था मामला पिछले साल हुआ बड़ा बदलाव
राज्य में नई गाइडलाइन दरें लागू की गई। दरों के निर्धारण नियम, 2000” के तहत केन्द्रीय मूल्यांकन बोर्ड, रायपुर द्वारा अनुमोदित ये दरें 20 नवंबर 2025 से प्रभावी हुई थीं। यह संशोधन वर्ष 2018-19 के बाद पहली बार राज्यव्यापी स्तर पर किया गया था। देखा जाए तो करीब आठ वर्षों तक गाइडलाइन दरों में कोई बदलाव नहीं होने के कारण बाजार मूल्य और गाइडलाइन मूल्य के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया था। इसी अंतर को समाप्त करने के उद्देश्य से शासन द्वारा वैज्ञानिक पद्धति से दरों का युक्तिसंगत पुनर्संयोजन किया गया। इसमें जिलों की भौगोलिक स्थिति, शहरी-ग्रामीण संरचना, सड़क संपर्क, बसाहट तथा आर्थिक गतिविधियों में आए बदलावों को ध्यान में रखा गया है।




