गाइडलाइन में बदलाव का आदेश, संसोधन की फाइल लटकी, जनता के जेब पर पड़ रहा है आर्थिक बोझ, नवंबर 2025 को सरकार के किया बदलाव, विरोध के बाद फिर से किए संसोधन
रायगढ़।
जमीनों की नए दर को लागू करने शासन को काफी मशक्कत करना पड़ा, जिसे नवंबर 2025 को संसोधन किया गया ।नए सिरे से वार्ड के बजाए सड़को के आधार पर रेट तय किया गया। कही 30 से 40 प्रतिशत तक कि बढ़ोतरी हो गया, इसमें कई विसंगतियों के चलते बिल्डर एशोसिएशन ने इसका जमकर विरोध किया। आलम यह रहा कि पुनः सरकार ने संसोधन किया। लेकिन रायगढ़ में अब तक नए संसोधन की दर नही आ पाई है। जबकि इसके लिए पंजीकरण विभाग ने फाइल शासन स्तर पर प्रेषित किया है। ऐसे इसका सीधा असर जमीनों के रजिस्ट्री तथा शासन को राजस्व आय में प्रभावित होना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि कई महीनों की कसरत के बाद सरकार ने अचल संपत्तियों के बाजार मूल्य निर्धारण से जुड़ी नई गाइडलाइन दरों वर्ष 2025-26 को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक रायपुर में हुई। इसमें सभी जिलों में दर बढ़ाने के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। रायगढ़ में वार्ड के हिसाब से नहीं, केवल रोड के हिसाब से ही दरें तय की गई हैं। सूत्रों के मुताबिक करीब दरों में 20 प्रश का इजाफा किया गया है। कई सालों से जमीनों और अन्य अचल संपत्तियों की कीमतें नहीं बढ़ाई गई थी। वहीं इनको दूर करते हुए नई गाइडलाइन दरों का प्रस्ताव तैयार किया गया था। रायगढ़ शहर में सडक़ों के हिसाब से कीमतें होनी चाहिए लेकिन एक ही सडक़ से लगे दो वार्डों में जमीनों की कीमतें अलग-अलग थीं। गाइडलाइन में मुख्य मार्ग को परिभाषित ही नहीं किया गया था। वहीं नए दर से
अचल संपत्तियों की सरकारी गाइडलाइन दरों में बढ़ोतरी के साथ ही बाजार में हड़कंप मच गया है। जमीन, मकानों की रजिस्ट्री में बेतहाशा वृद्धि हो गई। शहर के 48 वार्ड के मुख्य मार्ग तथा एक एक गलियों को चिन्हित कर कही 30 से 57 फीसद तक दर को बढ़ाया गया है। नए रेट में ग्रामीण अंचलों की भूमि का भी यही हाल है।इसका असर सीधे आम आदमी पर रहा । वहीं, इससे सरकार के राजस्व में इजाफा होगा, लेकिन यह पैसा आम जनता की जेब से आएगा। जो उनके सपने के आशियाने के बीच खाई बनकर रहेगा। ज़िसमे शहर के नए पुराने दर का विश्लेषण किया जाए तो वर्ष 2024-2025 में वार्ड नंबर 16 बैकुंठपुर के सत्तीगुड़ी चौक से स्टेशन चौक तक पूर्व में मेन रोड 5930 रुपये और अंदर 24000 प्रति वर्ग फीट का दर था जो अब बढ़कर मुख्य मार्ग 78000 तथा अंदर की भूमि 20000 रुपये हो गया है। इसमे मुख्य मार्ग में 31 फीसद राशि बढ़ी है जबकि अंदर में कम हूई है। दूसरी ओर पुरानी मार्ग आदिवासी हास्टल 56800 अंदर 24000 नए दर में 78000 तथा अंदर की सड़क किनारे 20000 रूपये किया गया है। यह राशि 37 प्रतिशत बढ़ोतरी है। सत्ती गुड़ी चौक से दशरथ पान 57 तो स्टेशन मार्ग 31, भुजबधान तालाब की जमीनो की नई सरकारी कीमत 50 प्रतिशत बढ़ी हैं। हेक्टेयर की बात इसी क्षेत्र करे तो 2024 -2025 में 2135300 मुख्य मार्ग एवं अंदर 16425000 थी जो अब बढ़कर 3000000 रोये व अंदर 200000 इस तरह यह 40 एवं 31 प्रतिशत राशि बढ़ी है। यही हाल शहर के सभी वार्डो का है। बहरहाल नए दर से यह तो स्पष्ट है इससे राजस्व कोष भरेगा लेकिन जनता कस जेब पर इसका असर पड़ेगा औऱ मध्यम वर्ग के परिवारों के सामने कई तरह के संकट खड़ी हो सकती है।
बहरहाल नए दर को लेकर संसोधन की फाइल शासन स्तर में भेजा गया है लेकिन अब तक उसमें निर्णय नही पाया है।
पूर्व सरकार ने दी थी 30 प्रतिशत की छूट
पूर्वकांग्रेस की भूपेश बघेल की सरकार ने 2017 से पहले की दरों में 30 प्रश की कमी कर दी थी। जिससे राजस्व कम हो गया था। जमीनों की कीमतें आसमान छू रही हैं लेकिन सरकारी गाइडलाइन रेट बेहद कम हैं। इसमें बढ़ोतरी नहीं करने के कारण सरकार को राजस्व हानि हो रही थी और काला धन बढ़ रहा था। सभी जिलों से गाइडलाइन दर वृद्धि के प्रस्ताव मंगवाए गए थे। लेकिन यह छूट खत्म होने से आमजन से लेकर खास वर्ग को अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा था।
रजिस्ट्री के राजस्व में भी पड़ रहा है असर
सूत्रों के मुताबिक नवंबर से लागू नए कलेक्टर भूमि गाइडलाइन में रजिस्ट्री की रफ़्तार थम गई हैं पहले तो अत्यधिक स्टॉप दर रहा फिर जमीन की कीमत का बढ़ना भी रहा। इधर संसोधन की नए दर का प्रस्ताव शासन स्तर में भेजा गया है। चुकी अब तक इस पर निर्णय नही हो पाया है। यही वज़ह है कि इसका सीधा असर राजस्व आय पर पड़ रहा है मानो यह पूरी तरह से प्रभावित है।
नए दर को लेकर अलग अलग जिले में हो चुका है विरोध
नए गाइडलाइंस में कई तरह के विसंगतियों से भरा था, यही वजह रहा कि बिल्डर, रीयल एस्टेट कारोबारी इसके विरोध में आ गए, जबकि अन्य जमीन कारोबार से जुड़े लोगों ने भी इसका विरोध किया। उधर कांग्रेस शासन के छूट को समाप्त करने से कांग्रेसी भी सरकार के रीति नीति को आड़े हाथ ले ली। विरोध में आंदोलन तक की। वही इसके बाद सरकार ने अपने फैसले को विचार में लेते हुए पुनः संसोधन करने का निर्णय लिया है।




