Thursday, January 15, 2026
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साल में 1858 पेयजल टेस्टिंग में 100 नमूने हुए फेल

साल में 1858 पेयजल टेस्टिंग में 100 नमूने हुए फेल, तमनार में फ्लोराइड तो पुसौर में मैग्नीशियम भरपूर

रायगढ़/ मध्यप्रदेश के इंदौर में दूषित पेयजल से फैली बीमारी इन दिनों पूरे देश में चिंता और चर्चा का विषय बनी हुई है। स्वच्छता सर्वेक्षण में देश का नंबर-1 शहर होने के बावजूद इंदौर जैसी स्थिति सामने आना यह संकेत देता है कि केवल रैंकिंग से पेयजल की शुद्धता सुनिश्चित नहीं होती। यही सवाल अब रायगढ़ जिले की पेयजल व्यवस्था पर भी खड़े हो रहे हैं।शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की कई पाइप लाइनें नालियों के भीतर या उनके संपर्क में होकर गुजर रही हैं, जिससे गंदे पानी के मिश्रण की आशंका बनी रहती है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा शहरी क्षेत्र में कराई गई पेयजल जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने से लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग को भी मनाही की गई है।

तमनार में फ्लोराइड का खतरा गहराया

गौरतलब हो कि लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग पर जल जीवन मिशन के तहत निर्मित जिले के 919 गांवों की पानी टंकियों को वर्ष में दो बार साफ कराने की जिम्मेदारी है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आती है। कई ग्रामीण इलाकों में वर्षों से पानी टंकियों की नियमित सफाई नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
पेयजल जांच के आंकड़े की बात करे तो वर्ष 2025 में पीएचई विभाग की प्रयोगशाला में कुल 1858 पानी के नमूनों की जांच की गई, जिनमें 100 से अधिक नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इन नमूनों में विभिन्न खनिजों की अधिकता पाई गई, जो स्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर खतरा मानी जाती है।ब्लॉकवार आंकड़ों पर नजर डालें तो रायगढ़ ब्लॉक में 788, पुसौर में 632 और खरसिया में 430 नमूनों की जांच की गई। तमनार क्षेत्र के 50 नमूनों में फ्लोराइड की अधिकता पाई गई। वहीं पुसौर में कैल्शियम और खरसिया में कैल्शियम व मैग्नीशियम की मात्रा तय सीमा से अधिक दर्ज की गई। तमनार क्षेत्र में ही फ्लोराइड से जुड़े 15 से अधिक मामले तथा 35 से अधिक नमूनों में पीएच स्तर असामान्य रूप से अधिक पाया गया।

खनिजों की अधिकता से बीमारियों का खतरा

विदित हो कि पेयजल में फ्लोराइड की अधिकता से दांतों और हड्डियों से जुड़ी बीमारी फ्लोरोसिस का खतरा बढ़ सकता है, जिससे दांत पीले पड़ना, हड्डियों में दर्द और चलने-फिरने में दिक्कत हो सकती है।वही कैल्शियम और मैग्नीशियम की अत्यधिक मात्रा लंबे समय तक सेवन करने पर किडनी स्टोन, जोड़ों में दर्द और पाचन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकती है।वहीं पानी का पीएच स्तर अधिक होने से पेट संबंधी रोग, त्वचा में जलन और बच्चों में पाचन तंत्र से जुड़ी परेशानियां बढ़ने की आशंका बनी रहती है।इंदौर जैसी घटना के बाद रायगढ़ जिले में सामने आए ये आंकड़े साफ तौर पर यह चेतावनी देते हैं कि यदि समय रहते पेयजल की नियमित जांच, टंकियों की सफाई सुनिश्चित नहीं की गई, तो स्थिति गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।

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