Saturday, January 17, 2026
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11 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल, शासकीय कामकाज ठप, स्कूलों में ताले, कहीं शिक्षक मौजूद तो छात्र नदारद

11 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल, शासकीय कामकाज ठप, स्कूलों में ताले, कहीं शिक्षक मौजूद तो छात्र नदारद

रायगढ़/ छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन के बैनर तले 11 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेशभर में चल रही हड़ताल का व्यापक असर बुधवार को जिले में भी देखने को मिला। हड़ताल के चलते अधिकांश शासकीय कार्यालयों में कामकाज पूरी तरह ठप रहा, वहीं इसका सीधा असर स्कूलों की व्यवस्था पर भी पड़ा। कई स्कूलों में ताले लटके नजर आए, जबकि कुछ स्कूलों में शिक्षक तो उपस्थित रहे, लेकिन छात्र उपस्थिति नगण्य रही। इन विषम परिस्थितियों में सीमित सरकारी कामकाज दैनिक वेतनभोगी कर्मियों के भरोसे चलता दिखाई दिया।फेडरेशन द्वारा पूर्व में कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने से कर्मचारियों-अधिकारियों ने चरणबद्ध आंदोलन को तेज करते हुए हड़ताल का रास्ता अपनाया। हड़ताल के कारण जिला, ब्लॉक और तहसील स्तर के कार्यालयों में फाइलें अटकी रहीं, आम नागरिकों को प्रमाण पत्र, पंजीयन, राजस्व, शिक्षा एवं अन्य जरूरी सेवाओं के लिए भटकना पड़ा।

शिक्षा व्यवस्था चरमराई

गौरतलब हो कि हड़ताल का असर शिक्षा व्यवस्था में भी साफ नजर आया।जहां जिला शिक्षा विभाग कार्यालय में अधिकारी कर्मचारी हड़ताल को अपना समर्थन देने में लगे थे ।तो वही दूसरी और शहर के कुछ स्कूलों में ताले नजर आए।वही कुछ स्कूल जहां शिक्षक की उपस्थिति तो देखने को मिली।परन्तु छात्र नदारद रहे।वही मध्याह्न भोजन भी बंद रहा।इसके अलावा शिक्षकों की पदस्थापना, स्थानांतरण एवं पदोन्नति की प्रक्रिया प्रभावित होने के साथ ही सेवा सत्यापन लंबित वेतन, एरियर, इन्क्रीमेंट व पेंशन प्रस्ताव एवं सेवानिवृत्ति व पारिवारिक पेंशन प्रकरणों के निपटारे पर भी प्रभाव पड़ा।

30 लाख रुपए से अधिक का कार्य पंजीयन विभाग में प्रभावित

विदित हो कि अधिकारी कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने से जहां सभी शासकीय कार्यालयों में कुर्सियां खाली रही।तो वही महिला बाल विकास विभाग, अंकेक्षण विभाग सहित पंजीयन कार्यालय के भी इसका असर देखने को मिला।महिला बाल विकास विभाग के माध्यम से संचालित शासन की कई योजनाएं जहां प्रभावित रही।तो वही जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र को लेकर हितग्राहियों को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी।दूसरी सर्वसामान्य दिनों में जहां भीड़ से गुलजार रहने वाले पंजीयन कार्यालय में भी लोगों का टोटा पड़ा था।विभागीय जानकारी के मुताबिक अगामी तीन दिनों तक चलने वाले इस हड़ताल से लगभग 30 लाख रुपए के उन्हीं कार्य जिले में प्रभावित होने की बात कही जा रही है।

क्या है 11 सूत्रीय प्रमुख मांगें

विदित हो कि फेडरेशन ने ज्ञापन में कर्मचारियों-अधिकारियों की 11 सूत्रीय मांगों को प्रमुखता से रखा है, जिनमें मोदी की गारंटी के अनुरूप प्रदेश के कर्मचारियों एवं पेंशनरों को केंद्र के समान देय तिथि से महंगाई भत्ता एवं महंगाई राहत दिए जाने की मांग,वर्ष 2019 से लंबित DA एरियर्स की राशि कर्मचारियों के GPF खाते में समायोजित किए जाने की मांग।प्रदेश के लिपिकीय, शिक्षकों, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास सहित विभिन्न संवर्गों की वेतन विसंगतियों को दूर करने की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग।सहायक शिक्षकों एवं सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को पदोन्नति सहित समुचित वेतनमान देने तथा नगरीय निकाय कर्मचारियों को नियमित/समयबद्ध पदोन्नति प्रदान करने की मांग।
प्रदेश में अन्य भाजपा शासित राज्यों की तर्ज पर कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने की मांग।अनुकंपा नियुक्ति नियमों को सरल बनाते हुए स्थायी आदेश जारी करने तथा 10 प्रतिशत सीमा समाप्त कर सभी पात्र पदों पर नियुक्ति देने की मांग।केंद्र की भांति प्रदेश में अर्जित अवकाश नगदीकरण 300 दिवस करने की मांग।प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा गणना कर समस्त लाभ प्रदान करने तथा पंचायत सचिवों का शासकीयकरण करने की मांग।
विभिन्न विभागों में संलग्न पदस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों की कमी को देखते हुए सभी विभागों में सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष किए जाने की मांग सहित प्रदेश में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी, अंशकालिक एवं संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण कर नियमित पदस्थापना देने की मांग शामिल है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी
छत्तीसगढ़ राज्य अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन की 11 सूत्रीय मांगों के समर्थन में 29, 30 और 31 दिसंबर को आंदोलन करेंगे. 31 दिसंबर को एक दिन का सामूहिक अवकाश लेकर रैली निकालते हुए सामूहिक हड़ताल में शामिल होंगे.।फेडरेशन ने स्पष्ट किया है कि यदि शासन द्वारा शीघ्र ही मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से लंबित मांगों के कारण वे आर्थिक और मानसिक दबाव में हैं, जबकि शासन स्तर पर आश्वासन के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
हड़ताल के चलते आमजन को हो रही असुविधा के बीच अब सभी की निगाहें शासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह कर्मचारियों-अधिकारियों की मांगों पर कब और क्या निर्णय लेता है।

वर्शन/छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन के तृतीय चरण का आंदोलन निर्णायक मोड पर है।11 सूत्रीय मांगों के साथ फेडरेशन लगातार आंदोलनरत है।तृतीय चरण 29 से 31तक जारी रहेगा।पूर्ववर्ती एवं वर्तमान सरकार द्वारा हमारी मांगों को नजरंदाज किया जा रहा है।सरकारी योजना को अमलीजामा कर्मचारियों द्वारा ही पहनाया जाता है।ऐसे में कर्मचारी हित की अनदेखी खेद का विषय है।

आशीष रंगारी
जिला संयोजक
छत्तीसगढ़ अधिकारी कर्मचारी फेडरेशन

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