अमृत मिशन योजना के दावे हकीकत से कोषों दूर, सीमित टैंकर ,फेल होते बोर ,पेयजल आपूर्ति को लोग फिर होंगे मजबूर
रायगढ़/ गर्मी की दस्तक के साथ ही शहर में पेयजल व्यवस्था को लेकर निगम की खामियां एक बार फिर उजागर होने लगी हैं। कई स्थानों पर लगे बोर सूखने लगे हैं और जलस्तर लगातार नीचे जाने से पानी की उपलब्धता प्रभावित हो रही है। स्थिति यह है कि कुछ जगहों पर बोर में अतिरिक्त पाइप डालकर पानी निकालने का प्रयास किया जा रहा है, तो कहीं पंप जलने और खराब होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे हालात में कई वार्डों की जलापूर्ति अब भी बोर पंपों पर ही निर्भर बनी हुई है।शहर में अमृत मिशन योजना के तहत पाइपलाइन बिछाने और घर-घर पेयजल उपलब्ध कराने का कार्य चल रहा है, लेकिन यह व्यवस्था अभी पूरी तरह सुचारू नहीं हो पाई है। कई क्षेत्रों में पाइपलाइन और कनेक्शन का काम अधूरा है, जिसके कारण लोगों को नियमित सप्लाई नहीं मिल रही। जिन इलाकों में अमृत मिशन के नल लगे हैं, वहां भी महज 40 से 45 मिनट तक ही पानी आने की शिकायत मिल रही है। खासकर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में दबाव कम होने से पेयजल आपूर्ति प्रभावित बताई जा रही है।
20 वर्षों की योजना, दो साल में ही सवालों के घेरे में
गौरतलब हो कि शासन द्वारा हर घर तक पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से अमृत मिशन योजना के तहत शहर के अलग-अलग जोन में लगभग आधा दर्जन पानी टंकियों का निर्माण कराया गया था। योजना के डीपीआर में 20 वर्षों तक 24 घंटे जलापूर्ति का दावा किया गया था, लेकिन जमीनी स्थिति इससे अलग नजर आ रही है। महज दो वर्षों के भीतर ही योजना की उपयोगिता और स्थायित्व पर सवाल उठने लगे हैं। कई वार्डों में अब भी लोगों को बोर पंपों और अस्थायी इंतजामों के सहारे ही पानी मिल रहा है।वही दूसरी और वर्षों से उपयोग में आ रहे बोर पंप अब जवाब देने लगे हैं। कई जगह पंप खराब हो रहे हैं, जबकि नए पंपों की उपलब्धता भी सीमित बताई जा रही है। ऐसे में निगम प्रशासन पुराने पंपों की मरम्मत कर काम चला रहा है। जलस्तर गिरने के कारण बोर की गहराई बढ़ाने और अतिरिक्त पाइप डालने का काम भी लगातार किया जा रहा है, जिससे समस्या की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
टैंकरों की कमी से बढ़ेगी परेशानी
अमृत मिशन की अपूर्ण व्यवस्था और घटते जलस्तर से निपटने के लिए नगर निगम वार्डों में टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचा रहा है। लेकिन 48 वार्डों की जरूरत के मुकाबले निगम के पास केवल 16 पानी टैंकर ही उपलब्ध हैं। लगातार उपयोग के कारण कई टैंकरों के टायर घिस चुके हैं और उनकी हालत जर्जर हो चली है। कुछ टैंकरों से पानी सप्लाई करने के लिए अस्थायी इंतजाम के तौर पर टूटी बोतल का इस्तेमाल किए जाने की भी बात सामने आई है, जो व्यवस्था की लचर स्थिति को दर्शाता है।
शहर में एक ओर बोर पंपों का फेल होना और दूसरी ओर अमृत मिशन के तहत सीमित समय के लिए मिल रही जलापूर्ति को देखते हुए आने वाले दिनों में पेयजल संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है। यदि समय रहते पाइपलाइन कार्य पूरा नहीं हुआ और वैकल्पिक व्यवस्था मजबूत नहीं की गई, तो गर्मी बढ़ने के साथ ही हालात और विकराल रूप ले सकते हैं।
वर्शन/ अमृत मिशन योजना पूरी तरह से फैल हो चुका है।योजना के तहत 20 वर्षों तक 24 घंटे पेयजल आपूर्ति का दावा किया गया था।परन्तु 24 घंटे तो दूर एक घंटे भी पानी मिलना मुश्किल हो चुका है।आने वाले दिनों में पेयजल आपूर्ति की समस्या और भी गंभीर हो सकती है।
सलीम नियारियां
पार्षद एवं पूर्व सभापति
नगर निगम




