रेलवे स्टेशन में सौंदर्यीकरण लेकिन यात्री सुविधाएं अब भी बेहाल

मरीजों ,और बुजुर्गो के लिए नहीं स्वचलित सीढ़ी,यात्रियों की संख्या देख ट्रेनें बढ़ाने को दरकार
रायगढ़/ साउथ ईस्टर्न सेंट्रल रेलवे के अंतर्गत देश के पांचवें सबसे बड़े स्टेशन होने के बावजूद रायगढ़ रेलवे स्टेशन यात्री सुविधाओं के मामले में लंबे समय से उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। यह स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है, जब एक ओर स्टेशन की रौनक बढ़ाने के लिए सौंदर्यीकरण का काम जोर-शोर से चल रहा है, वहीं दूसरी ओर आम यात्रियों की बुनियादी जरूरतों पर आज भी ध्यान नहीं दिया जा सका है।रायगढ़ स्टेशन से गुजरने वाली एवं यहां ठहरने वाली ट्रेनों की संख्या में अब तक कोई ठोस सुधार नहीं हो पाया है। यात्रियों को न तो नई सुविधाजनक ट्रेनों का लाभ मिल सका है और न ही पुराने परिचालनों में कोई उल्लेखनीय बदलाव दिखा है।
सबसे बड़ी समस्या बुजुर्गों, दिव्यांगों और बीमार यात्रियों के लिए एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म तक पहुंचने की है। इतने बड़े और व्यस्त स्टेशन पर स्वचलित सीढ़ियों (एस्केलेटर) अथवा लिफ्ट की व्यवस्था न होना रेलवे प्रशासन की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है। भारी सामान के साथ यात्रा करने वाले यात्रियों को भी इससे भारी परेशानी उठानी पड़ती है।
गोंडवाना एक्सप्रेस में आज भी पेंट्रीकार नदारद
गौरतलब हो कि ए-ग्रेड दर्जा प्राप्त रायगढ़ स्टेशन से गोंडवाना एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेन का परिचालन होता है, जो रायगढ़ से दिल्ली पहुंचने में करीब 24 से 25 घंटे का समय लेती है। इसके बावजूद विडंबना यह है कि अब तक इस ट्रेन में पेंट्रीकार की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है।लंबी दूरी की इस यात्रा में यात्रियों को भोजन और पेयजल के लिए पूरी तरह वैकल्पिक व्यवस्था पर निर्भर रहना पड़ता है, जो असुविधाजनक होने के साथ-साथ महंगा भी साबित होता है।रायगढ़ से बड़ी संख्या में लोग व्यापार, उपचार और शिक्षा के उद्देश्य से दक्षिण भारत की ओर यात्रा करते हैं। लेकिन सीधे साउथ रूट की ट्रेनें न होने के कारण यात्रियों को कोरबा-गेवरा जैसे स्टेशनों तक जाना पड़ता है।इससे न केवल उनका कीमती समय नष्ट होता है, बल्कि अतिरिक्त खर्च और शारीरिक परेशानी भी झेलनी पड़ती है।
यात्रियों की लंबे समय से मांग है कि रायगढ़ से साउथ के लिए सीधी ट्रेन सुविधा हो शुरू
पुना, रीवा रूट की ट्रेनों का रायगढ़ से परिचालन हो
इसी तरह पुणे और रीवा मार्ग की कई महत्वपूर्ण ट्रेनों का परिचालन फिलहाल बिलासपुर से किया जा रहा है। यदि इन ट्रेनों को रायगढ़ से प्रारंभ करने पर जहां रेल्वे को अतिरिक्त स्टॉपेज मिलने के साथ ही उसकी आय में भी बढ़ोतरी होगी।कुल मिलाकर रायगढ़ रेलवे स्टेशन पर दिखावटी विकास और वास्तविक यात्री सुविधा के बीच बड़ा अंतर साफ नजर आता है। सौंदर्यीकरण जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि यात्रियों को सुविधाजनक, सुरक्षित यात्रा की व्यवस्था हो सके।
अब देखना यह है कि रेलवे प्रशासन कब तक केवल रंग-रोगन तक सीमित रहेगा और कब जनहित से जुड़े इन अहम मुद्दों पर ठोस निर्णय लेकर रायगढ़ स्टेशन को उसकी वास्तविक पहचान दिला पाएगा।




